कविता

रक्षाबंधन

रक्षा सूत्र से बंधा यह संसार
लाया सबके लिए खुशियां अपार
प्रतीक भाई बहन के अटूट स्नेह का
आया रक्षाबंधन का त्योहार।

पड़े श्रावण माह के यह अंतिम दिन
वर्षा ऋतु व झूलों का मेल अभिन्न
दिलाए बचपन की स्मृति बारम्बार
आया रक्षाबंधन का त्योहार ।

सदा चाहते एक-दूजे की कुशल
करते कामना रहे भविष्य उज्जवल
दूर रहकर भी मन में अथाह प्यार
आया रक्षाबंधन का त्योहार।

सदियों से हम इसको मनाते आए
पौराणिक ग्रन्थ इसकी महिमा गाएं
हैं रंग-बिरंगी राखियों से पटे बाजार
आया रक्षाबंधन का त्योहार।

रोली व अक्षत का लगाकर तिलक
समेटती वह आंचल में पूरा फलक
खुश वह पाकर नन्हा सा उपहार
आया रक्षाबंधन का त्योहार।

भाई भी गर्व से न फूला समाये
प्यार से बहन को वह गले लगाए
धागे की महिमा है अपरंपार
आया रक्षाबंधन का त्योहार।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई