कविता- रिश्तों का एहसास संवेदना से होता है।
एहसासों से लिखे जाते हैं जहाँ रिश्ते,
शब्दों के मोहताज नहीं होते जहाँ रिश्ते,
चारों तरफ से प्यार होता है “परिवार”,
स्नेह की सरिता बहाते हैं जहाँ रिश्ते।
जिंदगी में अक्सर उलझ कर टूट जाते हैं,
रिश्ते बिना तकरार के कहां रह पाते हैं,
लौ यदि जलती रहे दिलों में प्रेम-स्नेह की,
वक्त पर यही रिश्ते जिंदगी में निखार लाते हैं।
रिश्तों का एहसास अनुभूति से होता है,
रिश्तों का एहसास मुस्कानों से होता है,
बिन कहे जो समझ जाए वही सच्चा रिश्ता,
रिश्तों का एहसास संवेदना से होता है।
टूटे मन को जोड़ने का प्रयास करते हैं रिश्ते,
ईश्वर की नेमत जग में ईश्वर की देन हैं रिश्ते,
लहू से नहीं बनते हैं रिश्ते बनते हैं त्याग से,
जो दिल के तारों को छेड़े, वही होते हैं पक्के रिश्ते,
रिश्तों का एहसास संवेदना से होता है।
— लीला तिवानी
