कहानी – अनकहा प्रेम
पूरे दिन की भागम- भागी मे सप्ताह कैसे बिताता है , पता भी न चलता खासकर दफ्तर जाने वाली महिलाओं को । सिर्फ छुट्टी का दिन ही बचता है अपने लिए, उसमें भी एक्स्ट्रा घर का काम! लेकिन हां , कोमोलिका उसके बाद बचे समय को सिर्फ अपने लिए इस्तेमाल करती। हर सप्ताह वह स्पा सेंटर पहुंचकर अपना अधिकांश समय वही बिताती, स्विमिंग , रेसलिंग आदि का आनंद उठाती । वही वह महिला अधिकारियों से अंदरूनी हिस्सों का मसाज का भी भरपूर मजा लेती, जिससे उसका पूरा शरीर खिल उठता। रोम – रोम प्रसन्नचित हो जाता है। उसके बाद घर आकर गर्म बदन को रिया सहला देती ।
रिया उम्र करीब 14- 15 साल । उम्र के इस मोड़ पर रिया भी पूरी तरह उसकी चाहतों को ठंडक पहुंचाती । कोमोलिका को भी उससे भरपूर संतुष्टि हो जाता । हर रोज की तरह कोमोलिका पूरी फ्रेंस होकर आज भी दफ्तर पहुंची ही थी कि
गुड मॉर्निंग सर, आई एम कोमोलिका देव.
ओके, मैं कंपनी का नया जनरल मैनेजर हूं , बट केवल एक प्रोजेक्ट के लिए और असिस्टेंट में कोमोरिका देव का नाम दिया गया है।
ओके सर ।
ज्यों ही आरामदायक कुर्सी घूमी ही थी कि सामने बैठे मैकडोनाल्ड को देख उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
तुम यहां!
तुम नहीं, आप बोलिए । miss komonika Dev , यह मत भूलिए आप मेरी असिस्टेंट हो, मै जो बोलूंगा, वह आपको करना होगा । मैकडोनाल्ड ने बड़े ऊंचे स्वर मे कहा।
यह सुन वह कुछ शक – फकाइ लेकिन मौन ही रही ।
ओके सर ,
मुझे इस प्रोजेक्ट के कुछ डिटेल्स दिए गए हैं , बाकी के स्रारे फाइलस और डाटा दोपहर तक मेरी टेबल पर पहुंचा दीजिए।
ओके सर , (धीमेश्वर में) इतना कह वह वहां से चली गई।
घंटो बैठ सोचती रही । पुरानी यादों में डूबी रही । किस तरह मैकडोनाल्ड ने मेरे जीवन में तूफानों का भंवर लाया था ।आज जब मैं फिर से एक बार सेटल हो गई हूं तो फिर.. .. लेकिन मैं अब उसके कारण अपने आप को नहीं तोड़ सकती, आज मैं कमजोर नहीं । मैं ईट का जवाब पत्थर से दूंगी। इतना कहते हुए वह प्रोजेक्ट के सारी फाइलें मैकडोनाल्ड तक पहुंचा दी। सर सारी फाइलें इसी प्रोजेक्ट से रिलेटेड है ।
वह निकल ही रही थी कि– एक स्वर आया —एक मिनट रुकिए !
क्या सर?
कोमोलिका जी, यदि मैं गलत नहीं समझ रहा हूं तो शायद आपको अभी भी मुझसे कोई शिकायत है? मगर मैं आपको बता दूं कि मैं अपनी प्रोफेशनल लाइफ और पर्सनल लाइफ को बिल्कुल अलग-अलग रखता हूं। शायद अब आप मेरे कहने का मतलब समझ चुकी होगी । Don’t worry, मैं यहाँ अपने प्रोजेक्ट को हंड्रेड परसेंट रिजल्ट देने आया हू । nothing else,
कोमोलिका भी काम में कुछ कम न थी । वह पूरे दिन अपने मन को दरकिनार कर निष्ठा से काम करती , फिर भी काम बढ़ता ही जा रहा था जिससे कर्मचारियो की व्यस्तता देख जनरल मैनेजर ने एक किटी पार्टी का आयोजन किया । सभी ने खूब मौज – मस्ती भी की।
जुलाई का महीना था। बरसात शुरू होता तो रूकने का नाम ही ना लेता। पार्टी खतम होते ही सभी अपने-अपने घर की ओर बढ़ गए । लेकिन चुकी मौसम का मिजाज देख दोनों बारिश रुकने का इंतजार करते रहे। नशे में धूर्त मैकडॉनल्ड उटपटंग कहानिया गढे जा रहा था ।
सर ऐसा करते हैं आज एक ही गाड़ी में दोनो चले जाते हैं। आपको मैं रास्ते में ड्रॉप कर आगे बढ़ जाऊंगी। मैकडॉनल्ड को सिक्योरिटी ने गाड़ी तक पहुंचा दिया। उनकी हालत देख कोमोलिका रात वहीं रुकने का फैसला की।
सुबह आंख खुलते ही कोमोलिका को वहां देख — अरे आप ,यहां कैसे? मैकडोनाल्ड ने पूछा।
सर , कल आपने कल कुछ ज्यादा ही लिक्विर ले लिया था । अकेले इतने बड़े फ्लैट में छोड़कर मुझे जाना सही नहीं लगा, इसलिए रुक गई। अब आपका होश आ गया है , मैं चलती हूं ।
मैकडॉनल्ड कुछ बोल पाते उससे पहले वह वहां से निकल गई।वह मन ही मन बहुत कुछ सोचता रहा ।
मैडम, आज आप रेस्ट कर लीजिए, मैकडोनाल्ड ने प्रातः फोन कर कहा।
क्यों सर ? कोमोलिका ने जानना चाहा।
वो कल यहा आपकी नींद अच्छे से नहीं हो पाई होगी इसीलिए कहा।
अरे सर , कोई नही । फर्स्ट काम, देन रेस्ट।
Ok then , as u wish .
कोमोलिका अपनै समय से दफ्तर पहुंची। वह पूरे दिन काम करती। कुछ और न सही , दोनों एक दूसरे की मुस्कुराते चेहरे को तो जरूर देखते । औरत का मन था कोमोलिका धीरे-धीरे अपनी पुरानी घटनाओं को भूलती जा रही थी। वह इरादे की बड़ी पक्की थी ।
वक्त बीतता गया । काम आगे बढ़ता गया । देखते – देखते तीसरा महीना भी आ गया । प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो ही चला था लेकिन सबमिट के समय शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव ने कंपनी के प्रोजेक्ट को पीछे उडाल दिया, जिससे वह टारगेट पूरा ना हो सका।
कंपनी के चीफ ऑनर के पूछने पर जवाब देही में कोमोलिका ने सारा कुछ अपने सिर ले लिया, जिससे उसे पुनः तीन महीना और काम करने का अवसर मिल गया।
वक्त के साथ दोनों की दोस्ती भी बढ़ती गई। मैकडॉनल्ड के घर जाने का दिन भी करीब आ गया । अब कोमोलिका अक्सर ही दुखी रहने लगी । पूछने पर वह बात को टाल देती। लेकिन बातों ही बातों में वह एक बार बोल पड़ी। प्लीज सर , मत जाइए मुझे छोड़कर फिर एक बार …
कोमोलिका ऐसे क्यों बोल रही हो, नम्रता मेरा इंतजार कर रही होगी। अब यह कहां संभव है? वक्त हमारे हाथो से निकल चुका है। इतना सुनते ही कोमोलिका जोर से अकड गई ।
अब मुझे निकलना होगा। मैकडॉनल्ड ने कहा।
उसके घर आते ही पूरा घर खुशी से झूम उठा, लेकिन उसके चेहरे पर एक चुप्पी देख नम्रता जानने की इच्छा भी जताई , लेकिन वह मौन ही रहता। अब मैकडॉनल्ड की दिनचर्या पूरी तरह बदल चुकी थी । वह पूरे दिन दफ्तर फिर देर रात घर आकर भी चुप्पी साधे रहता। वही दिनचर्या चलता रहा।
मम्मी पापा की चुप्पी देख बेटा सूर्या पर भी गहरा असर पड़ा। वह भी अधिकांश समय अपने कमरे में ही बिताने लगा। मां नम्रता उसे पूछने की कोशिश भी करती, लेकिन वह ऐसे ही कहकर टाल देता।
अचानक एक दिन विद्यालय से समर शिक्षक ने फोन कर शिकायत करते हुए कहा । मैडम मैं शौर्य का क्लास टीचर बोल रहा हू। सूर्या शुरु से ही पढ़ने में बहुत अच्छा था , लेकिन बीते कुछ महीनो से वह हमेशा कहीं खोया- खोया रहता है । यहां तक की इस बार उसके टेस्ट में भी बहुत कम नंबर आए है । प्लीज आप लोग उसे गाइड कीजिए ।
जरूर सर ,
नम्रता सोच में पड़ गई। आज संध्या वह इत्मिनान से बैठा ही था कि नम्रता ने —सूर्या, आज तुम्हारे विधालय से कॉल आया था । तुम्हारे नंबर इतने कम क्यो आए हैं बेटा ?
मम्मी , मुझे बहुत ज्यादा टेंशन हो गया है।
मगर क्यों बेटा?
मम्मी , मुझे आप लोगो को देखकर बहुत टेंशन होता है , जिससे मैं पढ़ भी नही पा रहा हू।
दो पल थम कर, बेटा हम तो ठीक ही हैं फिर क्या टेंशन ?
मम्मी मैं सब कुछ समझ रहा हूं , देख रहा हूं। मां अब तो हमारे बीच डाइनिंग टेबल पर भी कोई बात नहीं होता।
यह सुनते ही नम्रता अंदर से बौखला उठी। नम्रता ने वक्त को समझते हुए मैकडॉनल्ड से यह बात कही । ‘ हम यह क्या कर रहे हैं? ‘ अपने चक्कर में अपने बेटे की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। आज तो विद्यालय से उसकी अध्यापक ने भी फोन किया था। मुझे तो बहुत टेंशन हो रही है। नम्रता ने सारी बात बताइ।
वह भी बेटे की भावनाओं को सोचने लगा ।
अब दोनों मे थोड़ी बहुत जरूरत की ही भला बातें हो जाती। हालात के कुछ सुधरते देख नम्रता ने सपरिवार तीर्थ स्थल जाने की मांग की। मैकडोनाल्ड ने भी परिवार की खुशी के लिए फौरन टिकट बनवा लिया , जिससे अब वह हर टाइम नम्रता के साथ ही रहता ।
अब कोमोलिका से धीरे धीरे बाते कम होने लगी । उसके बदले रवैये को देख — सूर्या तुमहारी खुशी मे ही हमारी खुशी है। कोमोलिका ने कहा। यह सुनते ही तीनों का चेहरा गुलाब की तरह खिल उठा।
— डोली शाह
