भजन/भावगीत

गणपति बप्पा

आओ विराजो मेरे गणपति बप्पा
कब से था तुम्हारा इंतजार
हर लो प्रभु जन-जन की पीड़ा
हम सबकी है बस यही पुकार ।।

शुभ कर्ता श्री गणेश, तुम मंगलमूर्ति
पर भर में ही कर देते हो इच्छापूर्ति
मोदक का भोग करिये स्वीकार
कब से था लम्बोदर तुम्हारा इंतजार

घर-घर में आपकी चौकी सजी है
मनमोहक आपकी प्रत्येक झांकी है
भक्तजन करे रहे , आरती बार-बार
कब से था वक्रतुंड तुम्हारा इंतजार।

रूप आपका है अति सुख दायक
हम सब हैं आपके भक्त विनायक
भेंट हमारी करो अंगीकार
कब से था एकदंत तुम्हारा इंतज़ार।

हर बार आपको हम प्रेम से बुलाते
हो मूसक सवार तुम दौड़े चले आते
कृपा लुटाते रहते हम पर बारम्बार
कब से था गौरी पुत्र तुम्हारा इंतजार

रिद्धि ओर सिद्धि के हो तुम स्वामी
बुद्धि प्रदाता, दयानिधि, अंतर्यामी
लगाते आप सबकी नैया पार
कब से था गजानन तुम्हारा इंतजार

हो शुभ व लाभ प्रदान करने वाले
रोगों का तत्काल निदान करने वाले
हे प्रथम पूजनीय तेरी जय-जयकार
कब से था शिवसुत तुम्हारा इंतजार

फल, फूल, मेवा,मिष्ठान सब अर्पित
आपकी सेवा में हो जीवन समर्पित
बस इतना सा कर दीजिए उपकार
कब से था महाकाय तेरा इंतज़ार।

आप ही हो स्वयंभू अष्टविनायक
रमणीक यात्रा यह शुभ फलदायक
दर्शन पाकर सब हो जाते निहाल
कब से था भालचंद्र तुम्हारा इंतजार

सिद्धिविनायक रूप है सबसे प्यारा
निर्बल को आप से मिलता सहारा
सुख-समृद्धि का खुल जाता भंडार
कब से था विघ्नेश तुम्हारा इंतजार।

सार्वजनिक मंडलों की शोभा न्यारी
दर्शन को उमड़ पड़े सब नर-नारी
विसर्जन को घाट सजे-धजे तैयार
बप्पा जी की हो रही जय-जयकार।

आओ विराजो मेरे गणपति बप्पा
कब से था तुम्हारा इंतजार
हर लो प्रभु जन-जन की पीड़ा
हम सब की है बस यही पुकार।।

हर लो प्रभु जन-जन की पीड़ा
हम सबकी है बस यही पुकार।।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई

Leave a Reply