जलेबी
विधा- बाल कविता
शीर्षक- जलेबी
गोल-गोल हूँ जलेबी रानी,
उलझी हुई जैसे जिंदगानी,
पर रस में डूबी हुई रहती हूँ,
गर्मा-गर्म लाऊं मुँह में पानी।
बच्चों-बड़ों सभी को भाती,
स्वाद मिठास का मेरी थाती,
बार-बार सब मुझे खाना चाहें,
दूध के संग मैं खूब सुहाती।
त्योहारों की रौनक मुझसे,
हर खुशी की शान है मुझसे,
कुरकुरी और रसीली हूँ मैं,
दूर न रह पाए कोई मुझसे!
रंग केसरिया भारत की शान,
छनते-छनते भूलूं अपना भान,
इतनी-सी है बस मेरी कहानी,
मैं जलेबी खुद ही अपनी पहचान!
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
