बाल कविता

जलेबी

विधा- बाल कविता
शीर्षक- जलेबी

गोल-गोल हूँ जलेबी रानी,
उलझी हुई जैसे जिंदगानी,
पर रस में डूबी हुई रहती हूँ,
गर्मा-गर्म लाऊं मुँह में पानी।

बच्चों-बड़ों सभी को भाती,
स्वाद मिठास का मेरी थाती,
बार-बार सब मुझे खाना चाहें,
दूध के संग मैं खूब सुहाती।

त्योहारों की रौनक मुझसे,
हर खुशी की शान है मुझसे,
कुरकुरी और रसीली हूँ मैं,
दूर न रह पाए कोई मुझसे!

रंग केसरिया भारत की शान,
छनते-छनते भूलूं अपना भान,
इतनी-सी है बस मेरी कहानी,
मैं जलेबी खुद ही अपनी पहचान!
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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