बदले करवट ऊँट जब
बदले करवट ऊँट जब, बदले उसकी चाल।
समय बदलता देखिए, बदलें सब तत्काल॥
बदले करवट ऊँट जब, हिले रेत का गाँव।
मौसम जैसे बदलता, बढ़ता आगे पाँव॥
बदले करवट ऊँट जब, उठे धूल आकाश।
कल तक जो थे दूर सब, आज करें विश्वास॥
बदले करवट ऊँट जब, दिखलाता नव राह।
चले समय के साथ जो, पूरी उसकी चाह॥
बदले करवट ऊँट जब, बदले मन का रंग।
स्वार्थ जुड़ा हो प्रेम से, टूटे पल में संग॥
बदले करवट ऊँट जब, जागे सोया भाग।
मेहनत जिसके साथ हो, उसका गूंजे राग॥
बदले करवट ऊँट जब, बदले समय-विधान।
कल तक जो थे मौन सब, आज करें गुणगान॥
बदले करवट ऊँट जब, पग-पग बदले रेत।
जीवन की इस राह में, कौन रहा स्थिर चेत॥
बदले करवट ऊँट जब, बदलें सबके भाव।
हिम्मत जिसके साथ हो, उसको मिले पड़ाव॥
बदले करवट ऊँट जब, छूटे पुराना ठाँव।
नई दिशा की खोज कर, पाएँ ठण्डी छाँव॥
बदले करवट ऊँट जब, बदले जग की दृष्टिज
जो कल तक कमजोर था, उसमें दिखती सृष्टि॥
बदले करवट ऊँट जब, बदलें दिन और रात।
धीरज रखकर जो चले, उसकी बनती बात॥
बदले करवट ऊँट जब, रेत बने आधार।
मुश्किल राहों में मिले, साहस का संसार॥
बदले करवट ऊँट जब, झंझा दे संकेत।
चलना ही जीवन बना, रुकना केवल खेद॥
बदले करवट ऊँट जब, बदलें सारे माप।
समय सिखाता आदमी, खुद से करना जाप॥
बदले करवट ऊँट जब, टूटे मन का भार।
नई सुबह की ओर फिर, जीवन-रथ का सार॥
बदले करवट ऊँट जब, बदले जीवन-रंग।
सच्चे साथी साथ हों, जीते फिर हर जंग॥
बदले करवट ऊँट जब, जागे मन में आस।
सूनी राहों पर मिले, उम्मीदों की साँस॥
बदले करवट ऊँट जब, बदले भाग्य-लेख।
कर्मों से इंसान फिर, लिखता अपना लेख॥
बदले करवट ऊँट जब, समझ समय की चाल।
परिवर्तन से सीखता, जीवन हो खुशहाल॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
