कोई डूबता है तो डूबे!
विधा- कविता
शीर्षक- कोई डूबता है तो डूबे!
कोई डूबता है तो डूबे,
हमारी रील बननी चाहिए,
मिलें ढेर सारी प्रतिक्रियाएं,
लाइक्स से रील वाइरल होनी चाहिए!
हृदय हमारा हुआ पाषाण,
लाचारगी भी हमें दिखती नहीं,
क्यों बेकार के पचड़े में पड़ें,
बेचारगी कहीं किस्मत लिखती नहीं!
शायद इसने भी रील के लिए रिस्क लिया,
इससे बेहतर और क्या चाहिए!
डूबने वाला हमेशा खत्म नहीं होता,
नए रूप में लौटने के लिए डूबना चाहिए।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
