कविता

कोई डूबता है तो डूबे!

विधा- कविता
शीर्षक- कोई डूबता है तो डूबे!

कोई डूबता है तो डूबे,
हमारी रील बननी चाहिए,
मिलें ढेर सारी प्रतिक्रियाएं,
लाइक्स से रील वाइरल होनी चाहिए!

हृदय हमारा हुआ पाषाण,
लाचारगी भी हमें दिखती नहीं,
क्यों बेकार के पचड़े में पड़ें,
बेचारगी कहीं किस्मत लिखती नहीं!

शायद इसने भी रील के लिए रिस्क लिया,
इससे बेहतर और क्या चाहिए!
डूबने वाला हमेशा खत्म नहीं होता,
नए रूप में लौटने के लिए डूबना चाहिए।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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