माँ शारदे वंदना
हे हंसवाहिनी, ज्ञानदायिनी,
मातु शारदे मैया मेरी,
हम शरण में तेरे आए हैं।
अंधकार मिटा दो मन का मेरे,
ज्योति का दीप जलाए हैं।
वीणा के तारों से झंकृत,
स्वर अमृत बरसा दो माँ।
जिह्वा पर आप विराजो,
शब्दों को मधुर बनाओ माँ।
पुस्तक धारिणी, शुभ्र वसना,
कमल आसन पर शोभित माता।
मूर्खता मेरी हर लो,
विद्या-ज्ञान का वर दे दो,
सुख-समृद्धि की चाह नहीं,
बुद्धि-विवेक से पावन कर दो।
हे मातु शारदे, कृपा करो,
हम अज्ञानी बालक तेरे।
चरणों में शीश झुकाते हैं माँ,
भवसागर से पार करो माता।
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