जय जवान, जय किसान
जय जवान की गूँज से, जय किसान का मान।
शास्त्री जी ने दे दिया, भारत को सम्मान।।
अन्न उगाता खेत में, सीमा रखता शान।
दोनों के बल पर खड़ा, अपना हिन्दुस्तान।।
नहीं किया अभिमान कुछ, पाया बड़ा मुकाम।
जन-जन के मन में बसा, उनका पावन नाम।।
दीन-दुखी की पीर को, समझा अपना दर्द।
जनसेवा को मानकर, निभाया अपना फर्ज।।
लाल बहादुर शास्त्री, भारत के थे मान।
उनके त्यागी जीवन से, रोशन हिन्दुस्तान।।
माटी से जो प्रेम था, मन में था विश्वास।
देशहितों के सामने, फीका हुआ विलास।।
आज भी उनकी सीख से, जागे जन-अभिमान।
जय जवान, जय किसान से, गूँजे हिन्दुस्तान।।
त्याग तुम्हारा याद कर, नत है आज समाज।
देशप्रेम की राह में, तुम थे सच्चे राज।।
लाल बहादुर धन्य हैं, धन्य तुम्हारा नाम।
भारत माँ के चरण में, शत-शत कोटि प्रणाम।।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
