हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : गरबे का जोश, शरीर बेहोश

पहले गरबा भक्ति का माध्यम था। लोग माता की आराधना कर कुछ कदम घूमते थे, प्रसाद खाकर घर लौट आते थे। अब गरबा राष्ट्रीय स्तर का आयोजन बन गया है, जिसमें भक्ति से ज्यादा ड्रेस, डांस, फोटो और सोशल मीडिया की रीलों का महत्व है। गरबे वाली जोड़ियाँ एक दूसरे को “म्हारा सोणा रे…” गाकर मस्त हो जाती हैं। लो भाई, माता की आरती पाँच मिनट में समाप्त। माता रानी भी सोचती होंगी-“मेरे भक्तों, मेरी पूजा कर रहे हो या अपने फॉलोअर्स की संख्या बढ़ा रहे हो?” मन ही मन कहती होंगी-“बेटा, दर्शन करने आए हो या ऑडिशन देने!”

नौ दिन तक गरबा खेलने का उत्साह ऐसा कि ऑफिस में फाइलें नाचती हैं और रात में कमर। “नगाड़े संग ढोल बाजे।” की थाप सुनते ही पैरों में बिजली दौड़ती है। उम्र भले ही चालीस पार हो, लेकिन मन कहता है-“अभी तो मैं जवान हूँ!” शरीर बेचारा आवाज लगाता है-“मालिक, जवानी अपनी जगह है, मगर घुटनों की भी कोई उम्र होती है!”

गरबे के मैदान में कोई नागिन डांस कर रहा है, कोई हेलीकॉप्टर की तरह घूम रहा है और कोई ऐसा स्टेप मार रहा है, जिसे देखकर फिजियोथेरेपिस्ट की फीस “शेर माँ करते टॉप गेर मा आ जाती है।” कुछ लोग तो इस उत्साह में इतने चक्कर लगा लेते हैं कि घर लौटते समय उन्हें जूती या चप्पल पहनने का भी होश नहीं रहता। वे अपने साथी से कहते हैं-“ऐ भई पॉलिथीन में डाल दे यार और गाड़ी तू ही चला, मैं तो पंचर हो गया हूँ।”

सबसे मजेदार दृश्य तब होता है, जब नौ दिन तक सोफे पर बैठकर टीवी देखने वाला व्यक्ति गरबे की पहली रात डांस का सुपरस्टार समझने लगता है। दो घंटे तक लगातार घूमने के बाद जब कमर जवाब देती है, तो उसे समझ आता है कि शरीर कोई रिचार्ज होने वाला मोबाइल नहीं है, जिसे सुबह चार्ज करके रात भर चलाया जा सके।

अस्पतालों में भी इन दिनों गरबे का असर दिखाई देता है। किसी की कमर में दर्द, किसी की पिंडली में खिंचाव, तो किसी के घुटने में शिकायत! डॉक्टर पूछते हैं, “कितनी देर गरबा किया?” मरीज गर्व से जवाब देता है, “डॉक्टर साहब, पूरे चार घंटे!” डॉक्टर कहते हैं, “बहुत खूब! अब अगले चार दिन आराम कीजिए।” मरीज तुरंत पूछता है, “लेकिन डॉक्टर साहब, कल फाइनल राउंड है!” डॉक्टर माथा पकड़ लेते हैं। उन्हें लगता है कि बीमारी शरीर में कम और गरबे के जुनून में ज्यादा है।

असल समस्या गरबा नहीं, बल्कि जोश में होश खो देना है। मगर शरीर की क्षमता को नजरअंदाज करके लगातार घंटों नाचना समझदारी नहीं है। आखिर माता रानी भी यही चाहेंगी कि उनके भक्त नौ दिन आनंद से गरबा करें और दसवें दिन भंडारा सूत लें। विजयादशमी पर अपनी अकड़ी हुई कमर का दहन न करवाएँ! हे भक्तों गरबा जरूर खेलिए, जमकर खेलिए,  इस तरह नहीं कि अगले दिन आपकी पिंडली आपको देखकर कहे—”बस मालिक, अब अगले नवरात्रि में मिलेंगे!”

— संजय एम तराणेकर

संजय एम. तराणेकर

जन्म वर्ष 1968 कवि, स्वतंत्र लेखक व टिप्पणीकार। शिक्षा स्नातक एवं गायन में 1986 में विद् किया होकर केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद् द्वारा हिन्दी आषुलिपि प्रतियोगिता में वर्ष 1992 प्रषस्ति-पत्र प्राप्त। विशेष रूचि-बॉलीवुड फिल्में एवं संगीत, पुस्तक समीक्षा एवं राजनीति। मैं मूलतः मध्य प्रदेश के स्वच्छता में हैट्रिक लगा चुके एवं चार बार नंबर वन बनें स्मार्ट सिटी इन्दौर का निवासी हूँ। 1990 के दशक में लेखन में मन रमने लगा और ‘पत्र संपादक के नाम‘ से अपनी प्रारंभिक शुरूआत की। लेखकीय सुकून कितना संतोष देता है, इसकी बात ही कुछ और है। युवा होने पर फिल्मी कलाकारों की तरफ झुकाव ने फिल्मों पर आलेख लिखने की प्रेरणा दी। इसमें मेरी रूचि भी थी। विशेषकर पुराने फिल्मी कलाकारों के जीवन से सम्बंधित आलेखों पर अधिक ध्यान आकर्षित रहा। बावजूद इसके लघु कथा व कविता (बतौर युवा कवि आकाशवाणी इन्दौर में कविता पाठ के भी कई अवसर प्राप्त हुए है।) के अलावा सामयिक, सामाजिक एवं राजनैतिक विषयों पर समय-समय पर अपनी लेखनी को आयाम देने के प्रयास आज भी अनवरत हैं। अब तक विभिन्न समाचार-पत्रों में मुख्य रूप से बॉलीवुड/सिनेमा की साप्ताहिक मेगजीनों में आलेखों एवं पुस्तक समीक्षाओं का प्रकाशन हो चुका है। इनमें ‘लोकमत समाचार-आकर्षण व शो टाईम, राजस्थान पत्रिका-बॉलीवुड, पंजाब केसरी व दैनिक ट्रिब्यून के मनोरंजन, राज एक्सप्रेस-राज सिनेमा, द सी एक्सप्रेस-सी सिनेमा, हरि-भूमि के रंगारंग व रविवार भारती, चौथा संसार के बॉलीवुड, बीपीएन टाईम्स के शो बीपीएन व तरंग, लोकदशा के पर्दा-बेपर्दा व विविधा, नव-भारत एवं स्वतंत्र भारत के अलावा कई स्थानीय समाचार-पत्रों में भी आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। वहीं ‘स्वतंत्र वार्ता एवं डेली हिन्दी मिलाप‘ में कई वर्षो तक नियमित रूप से लिखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 31, संजय नगर, इन्दौर-452011 मध्य प्रदेश, (वार्ता+वाट्स एप) 98260.25986 ईमेलः s.taranekar@rediffmail.com, Facebook – https://www.facebook.com/Taranekar9

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