कविता

एक दिया फौजियों के नाम

आइए हम सब मिलकर इतनी तो जिम्मेदारी उठाएँ
कम से कम एक दिया अपने फौजियों के नाम जलाएं,
जिनके कारण हम और हमारा राष्ट्र सुरक्षित है,
उन सबका मान-सम्मान बढ़ाएं।
वो सीमा पर जागते हैं, तब हम चैन से सोते हैं,
ठंड-गर्मी-बरसात में सीमाओं पर वे जब मुस्तैद रहते हैं,
तीज त्यौहार, घर-परिवार, रिश्ते नाते उन्हें भी याद आते हैं
माँ का आँचल, पिता की छाया, पत्नी का सिंदूर,
बहन की राखी, बच्चों का बचपन उन्हें भी याद आता है,
पर धरती माँ के आगे सब कुछ भूल
वे मुस्कराते हुए डटे रहते हैं।
ऐसे में हम सबका भी इतना दायित्व तो बनता ही है
कि एक दिया उनके नाम का भी जलाएं
हम सब उनके साथ खड़े हैं, ऐसा उनमें विश्वास जगाएँ
दीपों के माध्यम से एक नया अभियान चलाएँ,
अपने-अपने आराध्य से उन सबकी सुरक्षा के लिए
अरदास, दुआ, प्रार्थना करें,
उनका उत्साह, आत्मविश्वास बढ़ाएं,
जय श्री राम के साथ जयहिंद वंदेमातरम् के
उद्घोष की गूँज सीमाओं तक पहुँचाएँ,
एक-एक दीप जलाकर उसका प्रकाश
सीमा पर खड़े फौजियों तक ले जाएं,
इस बार का दीप पर्व हम सब कुछ इस तरह मनाएं।

— सुधीर श्रीवास्तव

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921

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