मुक्तकंठा छंद
सबसे पहले कीजिए, इतना आप विचार।
देते जो संदेश हो, क्या उसका आधार।
मानवता के मीत तुम, बनते बड़े महान-
अपना जीवन काटते, लेकर नित्य उधार।।
लेकर नित्य उधार, कभी न डरते रब से।
वापस होगा दाम, झूठ कहते हो सबसे ।।१२
जो बोया सो काटिए, करना बाद विचार।
वैसे भी तुम जानते, जो इसका आधार।।
भले नहीं तू मानता, आया ऐसा दौर –
होगा कोई अब नहीं, मित्र स्वप्न साकार।।
सपना तेरा साकार, बता अब होगा कैसे।
सत्य यही है बात, मान ले प्यारे वैसे।।१३
आया ऐसा दौर है, सबको इतना चाव।
आता है इसमें मज़ा, देते गहरा घाव।
नहीं खास ये बात है, मत करिए तकरार-
अपने चप्पू को चला, खेते रहिए नाव।।
खेते रहना नाव, मजे में रहिए भाया।
आज यही संदेश, मित्र लेकर यम आया।।१४
निर्बल का कोई नहीं, पीड़ा समझे आज।
प्रभु जी कब तक भोगना, हमें पड़ेगा राज।
ठुकरा कर जाते चले, लोग बड़े बेदर्द-
और मानते गर्व से, शीश हमारे ताज।।
शीश हमारे ताज, सोचते करना क्या कल।
तुच्छ लगें ये लोग, धरा पर जो हैं निर्बल।।१५
खंजर जिसके हाथ है, बना घूमता शेर।
होता उसको है पता, भीतर से वह बेर।
पर सनकी होते बड़े, इनका क्या विश्वास –
नहीं समय का कुछ पता, कब लेगा मुँह फेर।।
कब लेगा मुँह फेर, छुपे रहना तुम अंदर।
लेते रहना नाम, सौंप ईश्वर को खंजर।।१६
चाहे जितना मिल गया, बात थी उसकी और।
भले भुला दें हम सभी, चिट्ठी वाला दौर।।
हमें याद वो डाकिया, जो आता था द्वार-
तकनीकों के दौर में, सुविधाओं पर गौर।।
सुविधाओं का शोर, आज भी भरते आहें।।
भले भुलाएँ आप, मगर इक चिट्ठी चाहें।।१७
गाते उसके गीत सब, जो समझें अधिकार।
गलत राह यदि हम चलें, लड़े करे तकरार।
शुभचिंतक होता वही, जिसको चिंता रोज-
हर मुश्किल में हो खड़ा, बनकर के हथियार।।
बनकर के हथियार, नहीं हमको भरमाते।
क्या मुश्किल है यार, गीत हम उसके गाते।।१८
चोला बदले हैं खड़े, बोलें मीठे बोल।
कहने को साथी सभी, मगर बहुत है झोल।
यही आज का दौर है, रहिए आप सचेत-
और प्रेम से नोचिए, इनके नकली खोल।।
इनके नकली खोल, टाँगकर घूमें झोला।
खड़े हुए जो साथ, पहनकर झूठा चोला।।१९
होना भी तो चाहिए, इतना भी तो ज्ञान।
जहाँ हमें बिल्कुल नहीं, हो झूठा अभिमान।
सीख नहीं मैं दे रहा, चलो आप निज राह-
मगर कभी मत भूलना, आप एक इंसान।।
आप एक इंसान, पड़े कल में मत रोना।
देखेंगे क्या आप, वही होगा जो होना।।२०
