डिफॉल्ट

आज के त्यौहार

त्यौहार आते हैं आते ही चले जाते हैं 

इंतज़ार जरूर होता है उनका 

पर आने पर वो ख़ुशी नहीं होती 

जो पहले हुआ करती थी 

त्यौहार का मतलब होता था 

एक दूसरे के घर आना 

एक दूसरे से प्यार से मिलना 

घरों से आने वाली पकवानों की खुश्बू 

वक़्त यह कैसा आया 

सब खत्म हो गया 

न रहा अब त्यौहार का कोई उत्साह 

अकेले ही त्यौहार की औपचारिकता निभाते हैं 

त्यौहार के नाम रस्म निभाते हैं 

त्यौहार त्यौहार सा लगता ही नहीं

*ब्रजेश गुप्ता

मैं भारतीय स्टेट बैंक ,आगरा के प्रशासनिक कार्यालय से प्रबंधक के रूप में 2015 में रिटायर्ड हुआ हूं वर्तमान में पुष्पांजलि गार्डेनिया, सिकंदरा में रिटायर्ड जीवन व्यतीत कर रहा है कुछ माह से मैं अपने विचारों का संकलन कर रहा हूं M- 9917474020

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