कविता

कविता

वो पेड़ो की छांव
ठंडी मस्त हवा
वो नंगे पांव दौड़ना
न भूख लगना न प्यास
सरपट भागना
वो चोरी से आम तोड़ना
पकड़े जाने पर
खूब पिटना
अगले दिन से फिर वोही

— रमा शर्मा

रमा शर्मा

लेखिका, अध्यापिका, कुकिंग टीचर, तीन कविता संग्रह और एक सांझा लघू कथा संग्रह आ चुके है तीन कविता संग्रहो की संपादिका तीन पत्रिकाओ की प्रवासी संपादिका कविता, लेख , कहानी छपते रहते हैं सह संपादक 'जय विजय'

One thought on “कविता

  • राज किशोर मिश्र 'राज'

    लाजवाब सृजन

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