सामाजिक

मतलबी क्यूँ हो गए हैं ???

आज ये सवाल हर इंसान के दिल में उठता है की आज लोग इतने मतलबी क्यूँ हो गए है ? इसमें ऐसी आश्चर्य वाली कोई बात नहीं है कि ऐसा क्यूँ है ? सच तो यही है कि संसार का हर रिश्ता जरुरत का रिश्ता है, हर प्राणी एक दुसरे से जरुरत के तहत जुडा हुआ है। जब प्राणी शिशु रूप में जन्म लेता है तब वो असहाय होता है, पुर्णतः दूसरों पर निर्भर होता है। परिवार का हर सदस्य उसकी हर जरुरत में उसकी मदद करने को तत्पर रहता है खासकर माँ।  बचपन में माँ के बिना वो अधुरा होता है।
एक दिन जब वो बड़ा हो जाता है तो वो आत्म-निर्भर हो जाता है, पर तब भी, माँ, परिवार के हर सदस्य और संसार के हर प्राणी से उसका रिश्ता ख़त्म नहीं हो जाता। बस होता इतना ही है कि अब उसकी एक नई दुनिया बन जाती है लेकिन जब तक जीवन है जरुरत बनी रहेगी और कोई भी इंसान अकेला कुछ नहीं है, सब से जुड़ कर ही संसार बनता है। फिर संसार का कोई भी रिश्ता हो चाहे पति-पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन व अन्य रिश्ते सब जरुरत के तहत ही एक दुसरे से जुड़े होते हैं।
हालांकि पहले भी ऐसा ही था पर पहले ये रिश्ते सिर्फ जरुरत या मतलब से ही जुड़े नहीं होते थे बल्कि दिल और भावना से जुड़े होते थे। तभी मतलब के नहीं कहलाते थे। आज चूँकि भौतिकवादी युग है इसीलिए हर रिश्ते में भावना कम होती जा रही है और रिश्ते बस मतलब निकल जाने तक सीमित होते जा रहे हैं।  अगर हर रिश्ते से हम दिल व भावना से जुड़ जाएँ तो हमारा हर रिश्ता स्वार्थ का न होकर निःस्वार्थ हो जाएगा फिर  वो चाहे संसार का कोई भी रिश्ता हो मानव से, पशु से या प्रकृति से। फिर सामने वाले का फायदा उठाने की बात कभी एक पल को भी हमारे दिल में नहीं आएगी,तब सिर्फ लेने की भावना या उपेक्षा हमें नहीं रहेगी बल्कि देने और और देते ही जाने के निःस्वार्थ भाव जागृत होंगा । जब लोग दिल से एक दुसरे से जुड़े होंगे तब एक दुसरे की मदद को तत्पर होंगे। मतलब निकालने या फायदा उठाने की बात कभी उनके दिल में नहीं आएगी। और यही है सच्चा रिश्ता एक प्राणी का दुसरे प्राणी से। हम सब उस परम पिता की संतान हैं और मिल जुलकर प्रेम से रहना हमारा परम धर्म है !!!

शशि शर्मा 'ख़ुशी'

नाम- शशि शर्मा 'खुशी'...जन्मतारीख - 6/6/1970 .... जन्म स्थान- सिलारपुर (हरियाणा) व्यवसाय - हाऊसवाईफ मूल निवास स्थान हनुमानगढ (राजस्थान) है | पतिदेव श्री अरूण शर्मा, की जॉब ट्रांसफरेबल है सो स्थान बदलता रहता है | पढने का बेहद शौक है,,,, अब लेखन भी शुरू कर दिया है | कुछ विविध पत्र-पत्रिकाओं में मेरी कवितायें प्रकाशित हो चुकी हैं |

2 thoughts on “मतलबी क्यूँ हो गए हैं ???

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत अच्छा लेख ! हम की भावना का लोप हो जाने के कारण स्वार्थ बढ गया है। परोपकार की भावना कम हो गयी है। यह स्थिति कैसे बदलेगी कोई नहीं जानता।

    • शशि शर्मा 'ख़ुशी'

      जी बिल्कुल सही कहा आपने,,, पर बदलना तो हम सभी को पडेगा न,,,,
      हार्दिक आभार सराहने के लिये |

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