कविता

कविता – अटलजी की यादें… बीता एक माह…

ये समय बड़ा ही धावक है

सदा दौड़ता रहता है
दिन रातों का आना-जाना,
घड़ी-पल से तोलता रहता है

वो गये लगा कल परसों था

      वो रहे बीच जो अरसों था
      उनके कर्मों का मधुर गान,
      कानों में घोलता रहता है ।
      ये समय बड़ा ही धावक है
      सदा दौड़ता रहता है ।।
आज बीत गया एक महिना
उनके जाने का दिन है ना
दिन-रात तेरा आना-जाना
दूरियां जोड़ता रहता है ।
ये समय बड़ा ही धावक है,
सदा दौड़ता रहता है ।।
      उनका ये कहकर जाना
      लौटकर बापिस आना
      निश्चित तब से मन मेरा
      वाट जोहता रहता है ।
      ये समय बड़ा ही धावक है,
      सदा दौड़ता रहता है ।।
कब बीत गया यूं एक मास
बीतेंगे बरसों यहाँ खास
है अटल कोई जो यादों की,
पोटली टटोलते रहता है ।
ये समय बड़ा ही धावक है,

सदा दौड़ता रहता है ।।

      गये अटलजी हमें छोड़
      ये मन क्यूं ना रहा उन्हें छोड़
      परतें-दर-परतें यादों की,
      वो क्यूं , खोलता रहता है ।
ये समय बड़ा ही धावक है,
सदा दौड़ता रहता है ।।
व्यग्र पाण्डे   

विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'

विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र' कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी,स.मा. (राज.)322201