कविता

क्षण

कुछ क्षण –
जीवन में छोड़ जाते हैं
अनगिनत सुखद आयाम |
और
बिखर जाते हैं –
वातायन के निलय में-
तारों की भाँति |
कुछ क्षण –
जीवन को भर देते हैं ,
विषैले दंशों से |
यह सत्य है ,
जीवन का हर क्षण –
हंता और नियंता है |
विचारो
जीवन के कितने क्षणों का किया है हनन तुमने |
और क्षणों ने तुम्हारा |
बने हो नियंता कितने क्षणों के और कितने क्षण बने हैं नियंता तुम्हारे |
मंजूषा श्रीवास्तव ‘मृदुल’

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016