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समाचारों में ‘सदानंदकु सुडोकु’

सुडोकु एक गणितीय विधा है, जो जापान से निकलकर संपूर्ण संसार में फैली अनोखी गणितीय पहेली है, किंतु विकिपीडिया के अनुसार, यह गणितीय पहेली सबसे पहले 1970 में न्यूयॉर्क में प्रकशित हुई थी, भारत के कई अखबारों ने भी इसके प्रकाशन में दिलचस्पी दिखाई । अब तो इस गणितीय पहेली की वास्तविक उम्र 50 वर्ष हो गयी है।

वर्ष 2020 तो सुडोकु का स्वर्ण जयंती वर्ष है। इतना तय है, सुडोकु जापानी शब्द है, जिनका अर्थ ‘अकेला अंक’ होता है। यह तो सिर्फ 9 अंकों की ही सुडोकु है, किंतु भारतीय लॉकडाउन में घर में अनवरत रहने को अवसर में ढालकर मैंने (Sadanand Paul) 81 अंकों [Eightyone digits] के वृहद सुडोकु बना डाला, जो कलम द्वारा कागज (पेपर) पर बनाई गई हस्तनिर्मित /हस्तलिखित यानी Handmade में संसार की सबसे बड़ी सुडोकु है।

इसे अगर बनानेवाले शख़्स को श्रेय दी जाय, तो मेरा नाम जोड़कर इस पहेली को ‘सदानंदकु’ (Sadanandku) भी कह सकते हैं !

डॉ. सदानंद पॉल

एम.ए. (त्रय), नेट उत्तीर्ण (यूजीसी), जे.आर.एफ. (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), विद्यावाचस्पति (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर), अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी के प्रशंसित पत्र प्राप्तकर्त्ता. गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स इत्यादि में वर्ल्ड/नेशनल 300+ रिकॉर्ड्स दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 12,000+ रचनाएँ और संपादक के नाम पत्र प्रकाशित. गणित पहेली- सदानंदकु सुडोकु, अटकू, KP10, अभाज्य संख्याओं के सटीक सूत्र इत्यादि के अन्वेषक, भारत के सबसे युवा समाचार पत्र संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में अर्हताधारक, पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.