सावन ऋतु
सुनहरी धूप और बरखा की टप टप बरसती बूंदे। सुरम्य समा था। तेजस और तारा दोनों पड़ोसी हैं। बचपन से एक ही आँगन में खेलते, कूदते, धमाचौकड़ी करते बड़े हुए है।
रिमझिम बूंदों का सुरमई संगीत, सावन की फुहारों में भीगा भीगा तन-मन। बारीश के पानी में छपाक-छपाक करते खेलना।
“ये रे पावसा…” गाते गाते एक दूसरे पर पानी उडाना।
न तो कीचड़ की घिन आती, ना बारिश में भीग कर बीमार पड़ने का डर सताता।
आज भी ऐसे ही झमाझम बारिश हो रही थी। तेजस और तारा साथ-साथ भीग रहे थे।रिमझिम फुहारें ने मन में अगन लगा रही थी। तेज धड़कन एक दूजे का साथ निभा रही थी।
लहराती पवन, बरखा की बूंदों ने दो प्रेमी दिलों को मिला दिया था।
सावन ऋतु बहका रही थी, जीवन महका रही थी।
