लघुकथा

जमीर

-चोपड़ा जनरेटर की मरम्मत में तूने भी खूब चांदी कूटी !
-जाँच कमेटी में तूने लीपा पोती करने की काफी कोशिश भी की ,पर कमेटी को तेरे खिलाफ सा क्ष्य मिल ही गए !
-सारे सबूत तेरे को अपराधी ठहरा रहे हैं . अब कमेटी ने दंड देने का फैसला मेरे ऊपर छोड़ा है . आखिर मैं इस सरकारी कम्पनी का कार्यकारी निदेशक जो ठहरा . सारी जबाबदेही तो मेरी ही बनती है .
-जी !

अरे रानी ,यदि साकी इतनी दूर बैठेगी ,तो अंगूर की बेटी अपना रंग कैसे दिखायगी ? रानी इधर आकर बैठो हमारे पास . ताकि शराब और शबाब दोनों सिर चढ़ कर बोलें और मुझे फैसला लेने में आसानी हो !
साहब की आँखों के डोरे लाल होने शुरू हो गए थे . रानी को लगा कि साले हरामी का अब शिकार किया जा सकता है .
-डियर लो अब आपके बिलकुल पास हूँ ,अब आपको अपने हाथ से ही पिलाऊंगी !
-वाह अब आया मजा ! शबाब के हाथ से शराब पीने का जायका ही कुछ और होता है !
-वैसे एक बात कहूं डियर !
-कहो !
-अपने चोपड़ा साहब भी एकदम घोचूं है. अगर कुछ करना ही था तो आपसे सलाह कर लेते . आप तो दिलवरजानी हैं, आप मना थोड़े ही कर देते !
-तुमने सही कहा जानू !
-तो डियर ऐसा करो , अब इस केस को संदेह का लाभ देकर खत्म कर दो !
-खुद ही फैसला सुनाते हुए रानी ने जाम साहब के होठों से लगा दिया .
-जानूँ ,तुम्हारी बात तो माननी ही पड़ेगी ! चोपड़ा तुम जाकर खाने की तैयारी करवाओ, हम दोनों अभी आते हैं !
पीने पिलाने तक तो सब चलता है ,पर मिसेस चोपड़ा ऐसी स्थिति के लिए तैयार नहीं थीं . उन्होंने चोपड़ा की ओर देखा ? चोपड़ा को भी करंट लगा . उसका सोया विवेक जाग उठा . उसने घायल शेर की तरह तडप कर कहा ,’’ सर ,खाना तो सब साथ मिल कर ही खाएंगे . आपने जो फैसला लेना हो , कल आराम से ले लेना .’

— विष्णु सक्सेना

विष्णु सक्सेना

पिता - स्व ;महाशय विशम्बर दयाल माता -स्व ;श्रीमती कौशिल्या देवी जन्म -26 जनवरी 1941 ,दिल्ली शिक्षा -,डी एम् ई आनर्स रूडकी विश्वविद्यालय 1964 सम्प्रति -सेवा निवृत डिप्टी चीफ इंजिनियर एच एम् टी पिंजोर ; अब स्वतंत्र लेखन ; राज्य श्रेष्ठ कृति -बैंजनी हवाओं में [काव्य संग्रह ] भाषा विभाग हरियाणा द्वारा [1972] ;अक्षर हो पुरुस्कार तुम [खंड काव्य ] हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा 2014 ; पुरुस्कृत कहानियाँ -वापसी [1996] ,चमक आत्म सम्मान की [1997] ,मुक्ति एक बोन्जाई की [1999] तीनो कहानियां हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पुरुस्कृत लघु शोध प्रबंध -विष्णु सक्सेना –व्यक्तित्व व कृतित्व [1998] कुसुम लता द्वारा :कहानीकार विष्णु सक्सेना [2004] अनीता नयन द्वारा : अक्षर हो तुम में मानव मूल्य [2017] कृषण चंदर द्वारा ; सभी कुरुषेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा से एम् फिल के लिए स्वीकृत सम्मान -राष्ट्रीय हिंदी सहस्त्राब्दी सम्मान [2000] मानव संसाधन मंत्रालय नई दिल्ली : व अन्य सम्पादन -कलादीप [लघु पत्रिका ]1973 से 1975 तक :चित्रांश उदगार [एकता अंक ]सितम्बर 1997 मौलिक कृतियाँ -काव्य संग्रह –बैंजनी हवाओं में 1976, गुलाब कारखानों में बनते हैं 1995,धूप में बैठी लड़की 2010 .सिरहन सांसों की 2013 :खंड काव्य –अक्षर हो तुम 2013 ,सुनो राधिके सुनो 2021 : कहानी संग्रह _बड़े भाई 1995 ,वापसी 2003 : लघु कथा संग्रह _एक कतरा सच 2018 सम्पर्क -एस जे 41 , शास्त्री नगर ,गाज़ियाबाद 201002 उ प्र : मो - 9896888017 ई मेल -vishnusaxena26@yahoo.com