सामाजिक

व्यसन मुक्त भारत: आज़ादी के 78 वर्षों का नया संकल्प

नशा बड़ा ही है शैतान, बना देता हमको हैवान||

15 अगस्त 2025 को हम आज़ादी के 78 गौरवशाली वर्ष पूरे कर रहे हैं। यह अवसर हमें हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को याद करने का ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का भी अवसर देता है — क्या हम वास्तव में हर प्रकार की गुलामी से मुक्त हो पाए हैं? एक ओर हमारा देश आर्थिक, तकनीकी और वैश्विक क्षेत्र में प्रगति कर रहा है, तो दूसरी ओर व्यसन और नशा जैसी सामाजिक बुराइयाँ समाज को भीतर से खोखला कर रही हैं। ऐसे में “व्यसन मुक्त भारत” का संकल्प आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

आज भारत जिस सबसे गंभीर सामाजिक समस्या से जूझ रहा है, वह है नशा और व्यसन की बढ़ती प्रवृत्ति।

व्यसन अर्थात किसी नशे या आदत का ऐसा चंगुल जिसमें व्यक्ति अपना विवेक, स्वास्थ्य, धन, समय और रिश्तों तक को खो देता है। यह गुलामी शराब, तंबाकू, गांजा, ड्रग्स, मोबाइल गेमिंग, सोशल मीडिया और यहां तक कि पोर्नोग्राफी जैसे कई रूपों में फैल चुकी है।

सबसे चिंता की बात यह है कि भारत, जिसे दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र कहा जाता है और जहां 65 प्रतिशत से अधिक आबादी युवाओं की है, उसकी यही युवा पीढ़ी — जो देश का भविष्य और विकास की धुरी है — आज व्यसन के चंगुल में फँसी हुई है। जिस समृद्ध और विकसित भारत का सपना हम देख रहे हैं, वह उस स्थिति में साकार नहीं हो सकता, जब उसके निर्माता स्वयं नशे की गिरफ़्त में जकड़े हों।

युवा केवल राष्ट्र का भविष्य नहीं, वर्तमान का भी दर्पण हैं। अगर आज के युवा व्यसन की राह पर चलेंगे तो आने वाला कल कितना अंधकारमय होगा, इसका अंदाज़ा लगाना कठिन नहीं है। अब ज़रूरत है कि युवा स्वयं जागें, और दूसरों को भी जागरूक करें।

समाज का एक वर्ग, जो अभी भी शिक्षा से वंचित है, अज्ञानवश नशे की गिरफ़्त में आकर जीवन को बर्बाद कर रहा है। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वही व्यसन अब उन शिक्षित लोगों तक भी पहुँच गया है, जिनसे एक आदर्श और संस्कारित समाज की अपेक्षा थी। वे भी नशे को दिखावे और प्रतिष्ठा का हिस्सा मानकर गर्त की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे विकट समय में जरूरत है कुछ जागरूक, प्रेरणास्रोत युवाओं की, जो अपने आचरण और सेवा से समाज में प्रकाश बनें और भटकती युवा  पीढ़ी को दिशा देने का कार्य करें।

व्यसन केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं होती, यह पूरे समाज और राष्ट्र को प्रभावित करता है। यह न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को बर्बाद करता है, बल्कि उसके परिवार, सामाजिक व्यवहार, शिक्षा और रोजगार को भी प्रभावित करता है। इससे घरेलू हिंसा, अवसाद, आत्महत्या और अपराध जैसी घटनाओं में भी वृद्धि होती है। जब देश का युवा वर्ग अपनी ऊर्जा व्यसन में नष्ट करता है, तो राष्ट्र की उन्नति की गति भी धीमी हो जाती है।

माता-पिता, शिक्षक, और समाज के हर जागरूक नागरिक को मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाना होगा जहाँ बच्चों को प्रेम, मार्गदर्शन और सकारात्मक दिशा मिले।

अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि नशा मुक्त भारत का निर्माण करेंगे। व्यसन मुक्ति कोई एक दिन का कार्य नहीं है, यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। इसके लिए हमें शिक्षा, संस्कार, जागरूकता, और परिवारिक संवाद को मजबूत करना होगा।

जो व्यक्ति अपने शरीर, मन और विचारों पर नियंत्रण पा लेता है, वही सच्चा स्वतंत्र होता है। नशा मनुष्य को उसकी चेतना से दूर कर देता है। व्यसन से मुक्ति केवल शारीरिक नहीं, आत्मिक स्वतंत्रता की ओर पहला कदम है।

सरकार द्वारा नशा मुक्ति अभियान, नशा मुक्ति केंद्र और कानूनों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब समाज स्वयं इस दिशा में सक्रिय होगा। प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना होगा कि नशा न केवल स्वयं के लिए घातक है, बल्कि समाज और देश के लिए भी विनाशकारी है।

आज़ादी का सही सम्मान, व्यसन मुक्त हो हर इंसान।

— विशाल सोनी

विशाल सोनी

शिक्षा-MCA पेशा- शिक्षक वैशाली (बिहार) 8051126749