आज का युवा, संस्कारों से दूर
आज के बदलते दौर में युवा वर्ग समाज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। युवा शक्ति देश के भविष्य की नींव होती है, लेकिन वर्तमान समय में देखा जा रहा है कि युवा अपने संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं। आधुनिकता और भौतिकता की दौड़ में वे अपने माता-पिता, भाई-बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी धोखा करने में संकोच नहीं करते। कई बार तो वे इसे अपनी चालाकी या शान समझने लगते हैं।
इस बदलते व्यवहार के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है नैतिक शिक्षा और संस्कारों की कमी। आज के युवा सोशल मीडिया, इंटरनेट और बाहरी दिखावे के प्रभाव में आकर अपने पारिवारिक दायित्वों को भूलते जा रहे हैं। वे यह नहीं समझते कि परिवार ही उनके जीवन की असली ताकत है। माता-पिता का सम्मान, भाई-बहनों का साथ और रिश्तों की अहमियत ही इंसान को सच्चा इंसान बनाती है।
सिकंदर जैसे ऐतिहासिक उदाहरणों से भी हमें सीखना चाहिए। सिकंदर ने पूरी दुनिया जीत ली, लेकिन अपने लालच और अहंकार के कारण वह अकेला रह गया। उसी तरह, अगर आज का युवा भी केवल धन, शोहरत और भौतिक सुखों के पीछे भागेगा, तो वह भी अपने जीवन में अकेलापन और असंतोष ही पाएगा।
समाज और परिवार की मजबूती के लिए जरूरी है कि युवा अपने संस्कारों, संस्कृति और मूल्यों को समझें और अपनाएँ। उन्हें चाहिए कि वे अपने माता-पिता, भाई-बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ प्रेम, विश्वास और ईमानदारी का रिश्ता बनाए रखें। यही उनके उज्ज्वल भविष्य और सुखी जीवन की असली कुंजी है।
अंत में, यही कहा जा सकता है कि यदि युवा अपने संस्कारों की ओर लौटें, तो न केवल उनका जीवन, बल्कि पूरा समाज भी खुशहाल और मजबूत बन सकता है।
— डॉ. मुश्ताक अहमद
