सफ़र
हर सफ़र यूं आसान नहीं हुआ करते,
रास्ते की तलाश में भटकना पड़ता है।
दिल की मंजिलें यूं ही नहीं मिला करती,
संघर्षों के तीरों से गुजरना पड़ता है।।
नदियों के बहाव यूं ही नहीं रूका करते,
मेघों के रूख का पलटना जरूरी होता है।
दिल के नगमें यूं ही नहीं सुनाया करते,
प्रेम के आंचल का होना जरूरी होता है।।
सफ़र को यूं ही नहीं आजमाया करते,
जीवन के दायरे को समझना पड़ता है।
मौसम कभी यूं ही नहीं बदला करते,
ऋतुओं के दर्द को समझना पड़ता है।।
— सन्तोषी किमोठी वशिष्ठ “सहजा”
