अन्तस्थ की कलम
तुमने सिर्फ मेरे किरदार पढ़े होंगे,भावों के वेग उमड़ते देखे होंगे।मेरे अन्तस्थ की कलम देखी होती,तो शायद मेरा रंगीन सफ़र
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Read Moreप्रेम प्रतीक्षा सघन वन संकेत संकल्प थे,अश्रु मेघ धार बनकर बरसते चले गए।ऋतु वर्णन कैसे किस हाल में सुनाऊं तुम्हें,हम
Read Moreअनुमानित अंशों की शब्द रचना,भेदों के संयोजन से बनी योजना।बसन्त, ग्रीष्म, हेमंत, शीत की लहरें,सामाजिक परिपेक्ष की बिडम्बना ।। सुझावों
Read Moreहर रोज़ तेरा,तेरी खुद की परछाई से यूं जूझना ।रूदन भरीआवाज़ मेंआक्रोश से तेरा छटपटाना।। देख कर मुझे तेरे इस
Read Moreअतीत के चल चित्रों में,कुछ पन्नों पर अंकित थे ।मेरे बचपन के चल चित्रजिनमें छिपे मेरे सपने थे।। रोज़ एक
Read Moreतुम्हारे पैर में लिपटे धागे की कसावट मानों हृदय को जैसे घायल कर दिया हो प्रकृति शान्त और तुम्हारा यूं
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