रोटी बड़ी या देश बड़ा?
संसद गूंगी सांसद गूंगा
न्यायालय गूंगा न्यायाधीश गूंगा
सत्ता गूंगी शासन गूंगा
दल-दल गूंगा गण-गण गूंगा
बस्ती गूंगी घर-घर गूंगा
जन-जन गूंगा कण-कण गूंगा
धरम-करम का परचम गूंगा
पढ़ें-लिखें का दमखम गूंगा
इस देश का सिस्टम गूंगा
अशिक्षा का ग्राफ न पूछो?
महंगाई की भाप न पूछो?
बेरोज़गारी ज़िंदा डसती
छात्र लटकते हैं फांसी पर
हताशा, निराशा इतनी —
खून, मांस, लोग बेचें किडनी!
नगर-सिटी क्या, बस्ती क्या,
लोग भटकते दर-बदर
रोटी इतनी सस्ती क्या?
युवाओं-किसानों का
बढ़ रहा नित मृत्यु-आंकड़ा
इस प्रश्न के उत्तर में
संसद ने किया प्रश्न खड़ा —
रोटी बड़ी या देश बड़ा?
— नरेन्द्र सोनकर ‘कुमार सोनकरन
