नागपंचमी पर दोहे
श्रावण शुक्ला पञ्चमी, बहुत खास त्यौहार।
नागपञ्चमी आज भी, श्रद्धा का आधार।1।
महादेव ने गले में, धारण करके नाग।
विषधर कण्ठ लगाय कर, प्रकट किया अनुराग।2।
दुनिया को अमृत दिया, किया गरल का पान।
जो करते कल्याण को, उनका होता मान।3।
अद्भुत अपनी सभ्यता, अद्भुत अपना देश।
दयाधर्म के साथ में, सजा हुआ परिवेश।4।
खगमृग, हिलमिल कर रहे, दुनिया रहे निरोग।
नागदेव रक्षा करें, निर्भय हों सब लोग।5।
पूरी निष्ठा से करो, अपनेअपने कर्म।
जीवों पर करना दया, सिखलाता है धर्म।6।
मन्दिरमस्जिदचर्च की, नहीं हमें दरकार।
पंडितमुल्लापादरी, बने न ठेकेदार ।7।
जो कणकण में रम रहा, वो है मालिक एक।
धर्मपरायण सब रहें, बने रहें सब नेक।8।
मन में कभी न लाइए, ऊँचनीच का भेद।
नौका में करना नहीं, जानबूझ कर छेद।9।
वैज्ञानिकता से भरा, पर्वों का विन्यास।
ये देते हैं ऊर्जा, लाते हैं उल्लास।10।
— डॉ. रूप चन्द्र शास्त्री ‘मयंक’
