मुक्तक/दोहा

नागपंचमी पर दोहे

श्रावण शुक्ला पञ्चमी, बहुत खास त्यौहार।
नागपञ्चमी आज भी, श्रद्धा का आधार।1।

महादेव ने गले में, धारण करके नाग।
विषधर कण्ठ लगाय कर, प्रकट किया अनुराग।2।

दुनिया को अमृत दिया, किया गरल का पान।
जो करते कल्याण को, उनका होता मान।3।

अद्भुत अपनी सभ्यता, अद्भुत अपना देश।
दयाधर्म के साथ में, सजा हुआ परिवेश।4।

खगमृग, हिलमिल कर रहे, दुनिया रहे निरोग।
नागदेव रक्षा करें, निर्भय हों सब लोग।5।

पूरी निष्ठा से करो, अपनेअपने कर्म।
जीवों पर करना दया, सिखलाता है धर्म।6।

मन्दिरमस्जिदचर्च की, नहीं हमें दरकार।
पंडितमुल्लापादरी, बने न ठेकेदार ।7।

जो कणकण में रम रहा, वो है मालिक एक।
धर्मपरायण सब रहें, बने रहें सब नेक।8।

मन में कभी न लाइए, ऊँचनीच का भेद।
नौका में करना नहीं, जानबूझ कर छेद।9।

वैज्ञानिकता से भरा, पर्वों का विन्यास।
ये देते हैं ऊर्जा, लाते हैं उल्लास।10।

— डॉ. रूप चन्द्र शास्त्री ‘मयंक’

*डॉ. रूपचन्द शास्त्री 'मयंक'

एम.ए.(हिन्दी-संस्कृत)। सदस्य - अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग,उत्तराखंड सरकार, सन् 2005 से 2008 तक। सन् 1996 से 2004 तक लगातार उच्चारण पत्रिका का सम्पादन। 2011 में "सुख का सूरज", "धरा के रंग", "हँसता गाता बचपन" और "नन्हें सुमन" के नाम से मेरी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। "सम्मान" पाने का तो सौभाग्य ही नहीं मिला। क्योंकि अब तक दूसरों को ही सम्मानित करने में संलग्न हूँ। सम्प्रति इस वर्ष मुझे हिन्दी साहित्य निकेतन परिकल्पना के द्वारा 2010 के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार के रूप में हिन्दी दिवस नई दिल्ली में उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमन्त्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा सम्मानित किया गया है▬ सम्प्रति-अप्रैल 2016 में मेरी दोहावली की दो पुस्तकें "खिली रूप की धूप" और "कदम-कदम पर घास" भी प्रकाशित हुई हैं। -- मेरे बारे में अधिक जानकारी इस लिंक पर भी उपलब्ध है- http://taau.taau.in/2009/06/blog-post_04.html प्रति वर्ष 4 फरवरी को मेरा जन्म-दिन आता है