डूबे न देश, देश का नाम
धरती सुंदर अंबर सुंदर, नदियां-पर्वत-सागर सुंदर,
अपना देश है बहुत ही सुंदर, झंडा तिरंगा सबसे सुंदर।
इस झंडे की रक्षा हेतु, बलिदान हुए थे सेनानी,
अमर हो गए वीर देश के, अमर है उनकी कुर्बानी।
लहू की बूंद-बूंद लुटा गए, भारतीय स्वाधीनता के सेनानी,
दिल से दिलेर थे, देशभक्त सरफरोश थे और स्वाभिमानी।
कुर्बानियों को मेरा सलाम, पहुंचे सबके पास पयाम,
सर्वोपरि देश का हित है, डूबे न देश, देश का नाम।
हर इक सांस मेरी गाए गीत देश की रहनुमाई के,
लेखनी मेरी रचे गीत वो काम आएं देशद्रोही-पिराई के!
रंग जाऊँ मैं लेखनी संग देशभक्ति के रंग में,
इतना तो कर पाऊं माँ भारती की सेवा की तरंग में!
(पिराई= मसलना, दबाना)
— लीला तिवानी
