कविता

डूबे न देश, देश का नाम

धरती सुंदर अंबर सुंदर, नदियां-पर्वत-सागर सुंदर,
अपना देश है बहुत ही सुंदर, झंडा तिरंगा सबसे सुंदर।
इस झंडे की रक्षा हेतु, बलिदान हुए थे सेनानी,
अमर हो गए वीर देश के, अमर है उनकी कुर्बानी।
लहू की बूंद-बूंद लुटा गए, भारतीय स्वाधीनता के सेनानी,
दिल से दिलेर थे, देशभक्त सरफरोश थे और स्वाभिमानी।
कुर्बानियों को मेरा सलाम, पहुंचे सबके पास पयाम,
सर्वोपरि देश का हित है, डूबे न देश, देश का नाम।
हर इक सांस मेरी गाए गीत देश की रहनुमाई के,
लेखनी मेरी रचे गीत वो काम आएं देशद्रोही-पिराई के!
रंग जाऊँ मैं लेखनी संग देशभक्ति के रंग में,
इतना तो कर पाऊं माँ भारती की सेवा की तरंग में!
(पिराई= मसलना, दबाना)

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244