भजन/भावगीत

कृष्ण जन्म लीला

देवकी वसुदेव के कारागृह कक्ष, तिथि अष्टमी भादों कृष्ण पक्ष,
भक्तवत्सल भगवान भुवनेश, ले अष्टम अवतार जन्मे प्रत्यक्ष,
हुए प्रहरी अचेत ही अचानक, योगमाया ने बाॅंधा भयानक,
खुले बंधन देवकी वसुदेव के, पाया प्रकाश रुप सुंदर बालक ।

काल-काले घनघोर घिरे घन, चपला चमकी छुपे तारागण,
बरसी बरखा मूसलाधार, प्रगटे श्री नटवर नागर नारायण,
सांय-सांय शोर करे पवन, आच्छादित हुआ नील गगन,
टोकरी में रख बालक चले, वसुदेव शीश नवा हरि चरण ।

थर-थर कांपे कर वसुदेव के और धक-धक कर रहा हृदय,
आधी रात मचा कैसा प्रलय, धरा का पाताल में हो विलय,
काल करे देखो कैसा ये छल, क्षण-क्षण उफने जमुना जल,
अब बचाऊॅं बालकृष्ण को कैसे, विचलित मन हो पल-पल ।

प्रभु का कर रही स्वागत धरा, आज नाथ ने कष्ट सारा हरा,
घटा जल चरण छू स्वामी के, जमुना जल में “आनंद” भरा,
पहुॅंचे पलक झपकते गोकुल, यशोदा नींद में थी बिल्कुल,
दबे पाॅंव नंद गृह रखा पुत्र को, ले चले कन्या को हो व्याकुल ।

जन्म लिए श्री कृष्ण कन्हाई, मंगल “आनंद” खुशियॉं छाई,
यशोदा और नंद के अंगना, ओ सखी बहुत बधाई बधाई,
अरे ! ढोल बजाओ हाथी दीजै घोड़ा दीजै और दीजै पालकी,
जय बोलो प्रेम से जगत पालनहार बाल कृष्ण लाल की ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु