दौलत
चस्का लगा जिन्हें काले धन का
लूट- लूट स्विस बैंक हैं भरते
सौदा करते कफन का ।
यहीं धरी रह जायेगी ये दौलत ।
एक दिन गली खायेगी ये शोहरत।।
चस्का लगा जिन्हें काले धन का
मातृभूमि से करते गद्दारी
खा जाते हक आमजन का ।
बहुत दुखद जीवन निर्धन का ।
मौल न कोई उनकी घुटन का ।।
ए.सी. में रहने वालों
क्या तुमको अहसास नहीं मौत का
एक झटके में मिला, अमिला सब छूटे ।
धन- दौलत, अपने-परायों सबसे नाता टूटे ।।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
