मोहब्बत एक पागलपन की कहानी
तुमने अपना ये क्या हाल बना रखा है,
तुमने मेरे इस संसार से जाने के बाद, मेरी याद में
अपने -आप को क्यों मुर्दा लाश बना रखा है,
इश्क तों मेरे भी दिल ने, तुमसे बेइंतहा किया है,
और तुम्हें ऐसे तड़प तड़प कर जिंदा मरते देख कर
मेरी रूह को भी सुकून कहा मिलता है,
इस जन्नत में…
अगर तुम्हें मंजूर है, तों तुमसे एक इल्तिजा है,
मेरे दिल की, तुम मुझे भुला दो अपने दिल से,
अब वक्त आ गया है की तुम भी मुक्त हो जाओ
मेरी मोहब्बत से भरी यादों के दर्द से,
मैं तुम्हें दर्द में तड़पता हुआ छोड़कर,
जन्नत में नहीं जा सकती इस वसुंधरा से,
मुझे भी सौगंध है तुम्हारे प्यार की,
जब तक मैं तुम्हारा मुस्कुराता हुआ चेहरा
नहीं देख लेती मै कहीं नहीं जाऊंगी
इस मृत्यु लोक से. ये, वादा मेरा खुद से
अब अगर तुम मुझे जन्नत
की सैर कराना चाहते हो,
तुम चाहते हो कि मेरी रूह को,
जन्नत में शांति मिले…
तों मुझे मिटा दो, मुझे मिटा दो अपनी कहानी से
अब तुम्हारे हाथ में है मेरी कहानी मेरे महबूब
देखना है मुझे ये, अब
मेरे नसीब में क्या आता है,
जहन्नुम की काली रात या
जन्नत का सुनहरा पानी
क्योंकि मेरे महबूब तुम हीं हो,
मोहब्बत में मेरे पागलपन की कहानी
कसम से…
— आकाश शर्मा आज़ाद
