बाल कविता
गुल्लक मेरी है छोटी-सी,
रंग बिरंगी सुंदर प्यारी-सी।।
खनखन उसकी प्यारी है,
खुशियां छितराती न्यारी है।।
मम्मी पापा जब पैसे देते,
गुल्लक को मैं थमा देता।।
बाजार जाने का जब मन हो,
गुल्लक मेरा साथ निभाता।।
बंधी मुठ्ठी है गुल्लक मेरा।
सबका प्यार उसमें समाया।।
बचत की आदत है प्यारी,
कहता मेरा गुल्लक महाज्ञानी।।
