माता-पिता का अहसास
माता व पिता का सुखद अहसास,
अपने ‘बच्चों’ के लिए होता खास।
बहुत ज्यादा उम्मीदें होता आभास,
भविष्य के लिए चिंता होती आस।
वह अपने बच्चे का लालन-पालन,
उन्हें पढ़ाने-लिखाने करें संचालन।
अपना जीवन सन्तान में समर्पित,
बच्चे भविष्य बनाके सब अर्जित।
अपने पैरों पे खड़े कर होते हर्षित,
मुसीबतें आने पे न होते विचलित।
अपने ‘सपनों’ को यूँ सजाए रखते,
बच्चे को देखे जैसे सितारे चमकते।
— संजय एम तराणेकर
