कविता

राजनीति और अंतरात्मा (व्यंग्य)

अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए
वो महानुभव राजनीति में आ गया,
तोड़फोड़ दंगा फसाद कराकर
नव नेता जी सबके दिलों में छा गया,
इस तरह की राह चुनने के लिए भी
नव नेता जी को अंतरात्मा ने कहा था,
इस स्थान पर आने के लिए उसकी
अंतरात्मा ने पता नहीं क्या क्या सहा था,
अपनों को छोड़ दुश्मनों से मिल जाने
दरअसल अंतरात्मा ने ही कहा कि
लोगों की अपनी ताकत बता देना,
विरोधियों को रास्ते से हटा देना,
चेहरे से तो दिखता था मुस्कुराना,
मगर दिखता नहीं था अंतस का गुर्राना,
घर परिवार तो उसका ज्वाइंट था,
मगर किसी को तज लाभ को अपना लेना
उनका सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट था,
समय असमय झूठ बोलना,
किसी की मर्यादा-इज्जत को तोलना,
मर्यादित आचरण से होना जरूरी नहीं
बल्कि मर्यादित दिखना जरूरी था,
अंतरात्मा की बातों को मान
दिखावा सीखना जरूरी था,
बहुतों की गर्दन काट उत्तरोत्तर आगे
बढ़ते रहने के लिए
सिर्फ एक की इशारे को जाना,
राजनीति में सफल होने के लिए
नव नेता ने सिर्फ अंतरात्मा की आवाज को माना।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554