प्रधानमंत्री मोदी जी का सफ़र ,भारत की राजनीति का स्वर्णिम अध्याय,
प्रधानमंत्री मोदी जी का राजनीतिक सफ़र भारतीय राजनीति का एक ऐसा उत्कर्षपूर्ण अध्याय है जिसे आने वाली पीढ़ियाँ लंबे समय तक स्मरण करेंगी। यह केवल सत्ता का सफ़र नहीं बल्कि एक ऐसे नेता की गाथा है जिसने साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भारतीय राजनीति और जनमानस पर गहरी छाप छोड़ी। आज जब वह प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर संभवतः राजनीतिक संन्यास की ओर बढ़ रहे हैं, या भविष्य में उनकी अपनी पार्टी के लिए क्या भूमिक रहेगी ये विषय भविष्य के गर्भ ने छुपा हुआ विशिष्ट प्रश्न जो बहुत महत्वपूर्ण है,पूरा देश एक ऐसे व्यक्तित्व को देख रहा है जिसने 21वीं सदी के भारत की दिशा और दशा दोनों बदल डाली।
प्रधानमंत्री मोदी जी का जन्म गुजरात के वडनगर में एक साधारण परिवार में हुआ। बाल्यकाल से ही उन्होंने कठिन परिस्थितियों में जीवन जिया और संघर्ष के बीच नेतृत्व तथा संगठन कौशल की झलक दिखानी शुरू कर दी। आगे चलकर वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और फिर भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाई। राजनीति में उनकी उभरती हुई छवि अनुशासन, परिश्रम और जमीनी स्तर के अनुभव पर आधारित थी। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके नेतृत्व ने एक नए प्रकार की विकासशील राजनीति को मंच दिया। उनके कार्यकाल में गुजरात ने आर्थिक गतिविधियों, आधारभूत ढाँचे और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की, जिसने उन्हें “विकास पुरुष” की पहचान दिलाई।
2014 का आम चुनाव भारतीय राजनीति का निर्णायक मोड़ साबित हुआ जब प्रधानमंत्री मोदी जी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने। यह वह क्षण था जब जनता ने कांग्रेस-शासित लंबे दौर के बाद भाजपा को पूर्ण बहुमत दिया। प्रधानमंत्री मोदी जी ने “सबका साथ, सबका विकास” का आह्वान कर जनता की आकांक्षाओं को नई ऊर्जा दी। उन्होंने शासन को तकनीक-आधारित और भविष्यगामी दृष्टिकोण से जोड़ा। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे कार्यक्रमों ने नई पीढ़ी को स्वप्न और अवसर दोनों दिए।
विदेश नीति के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री मोदी जी का दृष्टिकोण बेहद सक्रिय और निर्णायक रहा। उन्होंने भारत की छवि को वैश्विक मंच पर अधिक प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। पड़ोसी देशों से संबंधों में सुधार लाने का प्रयास किया, पश्चिमी दुनिया और एशियाई देशों के साथ नए गठबंधन बनाए तथा संयुक्त राष्ट्र और जी-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति मजबूत की। उनकी विदेश यात्राएं और वैश्विक वाणी ने भारत को नई पहचान दिलाई।प्रधानमंत्री मोदी जी के शासनकाल में कई ऐतिहासिक निर्णय किए गए। नोटबंदी का कदम भ्रष्टाचार और काले धन पर चोट के रूप में लिया गया, हालांकि इस पर बहस और आलोचना भी बहुत हुई। “एक देश, एक कर” के रूप में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का लागू होना भारत की कर-व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन था। सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक रही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का हटना, जो लंबे समय से देश के राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहा था। इसके अलावा, राम मंदिर निर्माण को गति देना, नागरिकता संशोधन कानून और कृषि सुधार कानून जैसे कई निर्णय उनके कार्यकाल के प्रमुख बिंदु रहे। इन कदमों ने उनके समर्थकों की नज़रों में उन्हें राष्ट्रहितैषी नेता बनाया, वहीं आलोचकों ने इन्हें असहमति और टकराव बढ़ाने वाला बताया।
प्रधानमंत्री मोदी जी के व्यक्तिगत करिश्मे और जनता से उनके संबंध ने उन्हें भारतीय राजनीति का अनूठा नेता बनाया। उनकी वक्तृत्व कला ने जन-समुदाय को सम्मोहित किया। “मन की बात” जैसे रेडियो कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने करोड़ों लोगों से सीधा संवाद किया और सोशल मीडिया का अभूतपूर्व उपयोग कर राजनीति में नई ऊँचाइयाँ छुईं। उनकी चुनावी रणनीति और संगठन क्षमता ने भाजपा को भारत की सबसे मजबूत राजनीतिक शक्ति बना दिया।अब उनके प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे के साथ यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि भारतीय राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। प्रधानमंत्री मोदी जी का यह निर्णय केवल सत्ता से विदाई नहीं, बल्कि एक युग का अंत है। उनके समर्थक उन्हें आधुनिक भारत को नई पहचान देने वाला नेता मानते हैं, जबकि आलोचक उनकी नीतियों के दीर्घकालिक प्रभावों पर विमर्श कर रहे हैं। हालांकि इतना निश्चित है कि प्रधानमंत्री मोदी जी की राजनीतिक यात्रा एक मिसाल है कि कैसे संकल्प और दूरदृष्टि के बल पर कोई नेता देश की आम जनता की आकांक्षाओं को राष्ट्रीय राजनीति और शासन की धारा में बदल सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी जी की विरासत इतिहास में उनके निर्णयों, सुधारों और उनके द्वारा निर्मित राजनीतिक-सामाजिक धाराओं के आधार पर आँकी जाएगी। उन्होंने भारत में एक ऐसा नेतृत्व मॉडल प्रस्तुत किया जो करिश्मा, संगठन शक्ति, निर्णायक निर्णय और जनता से संवाद की क्षमता पर आधारित था। यह यात्रा केवल प्रधानमंत्री मोदी जी की नहीं, बल्कि उस भारत की है जो निरंतर बदलाव और प्रगति की ओर अग्रसर है। निश्चित रूप से, प्रधानमंत्री मोदी जी का यह इस्तीफा केवल पद त्याग नहीं बल्कि भारतीय राजनीति के एक स्वर्णिम युग का समापन है, एक ऐसा युग जिसे आने वाली पीढ़ियाँ विस्तार से समझेंगी और याद करेंगी।
— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह
