कविता

कहना शायद मुश्किल है

कहना शायद मुश्किल है,
शायद कहना मुश्किल है।
कितने दर्द समाए मन में,
शायद कहना मुश्किल है।।

प्रेम की अग्नि न जानी हमने,
हवन स्वयं का कर दिया।
खाली खाली जीवन जीकर,
औरों का मन भर दिया।।

कितने खाली खाली हम हैं
कहना शायद मुश्किल है।
कितने दर्द समाए मन में
शायद कहना मुश्किल है।।

चौराहों पर मार्ग भटककर,
दिशा हीन हम हो गए।
भूल गए हम राहें अपनी،
अनजाने पथ खो गए।

कितने भूले भटके हम हैं
कहना शायद मुश्किल है,
कितने दर्द समाए मन में
शायद कहना मुश्किल है।।

नए स्वरों की चाहत में,
तार पुराने टूट गए।
कितने कदम चले थे संग में,
हम तो पीछे छूट गए।।

कितने पीछे छूट गए हम,
कहना शायद मुश्किल है।
कितने दर्द समाए मन में,
शायद कहना मुश्किल है।।

— सौष्ठव

सौष्ठव त्रिपाठी

जन्म तिथि 2 जुलाई सन 1989 मोबाइल नंबर - 9140928429 विधा - गीत, ग़ज़ल, छंद, मुक्तक आदि। संप्रति- बेसिक शिक्षा परिषद् उत्तर प्रदेश में कार्यरत पता- कस्बा एवं पोस्ट किशनपुर जनपद फतेहपुर उत्तर प्रदेश 212658