खुशियों की सरगम
पहली-पहली बार बने हैं, दादी अम्मा हम।
दिग-दिगंत में गूँज उठी हैं, खुशियों की सरगम।।
अब तो हम भी लिख डालेंगे, नयी-नयी लोरी।
प्यार लुटाएँगे जी भर अब, बात नहीं कोरी।।
खूब बधाई गाएँगे हम, नृत्य करें छमछम,
पहली-पहली बार बने हैं, दादी अम्मा हम।।
सुन लो मुन्नू, सुन लो चुन्नू, अब मेरी बारी।
मेरे घर में भी गूँजेगी, नन्हीं किलकारी।।
तुम सब आना, उधम मचाना, टूटे अब संयम,
पहली-पहली बार बने हैं, दादी अम्मा हम।।
कथा लिखेंगे परियों की जो, दिखलाए जादू।
गुलगुल गालों को छूकर हम, होंगे बेकाबू।।
ताल मिलाएँगे दादू भी, ढोलक पे ढमढम,
पहली-पहली बार बने हैं, दादी अम्मा हम।।
लाड़ लड़ाएँगे जी भरकर, कहते हम सच्ची।
हम भी बच्चे बने हुए यह उम्र हुई कच्ची।।
जीवन-तार कसेंगे हम तो, वीणा-सा मध्यम,
पहली-पहली बार बने हैं, दादी अम्मा हम।।
— गीता चौबे गूँज
