गीतिका/ग़ज़ल

तन्हाई

अकेलेपन से जूझ रहा इंसान हर कोई,
भीड़ में घिरा हो, फिर भी तन्हा है हर कोई।

ज़माना है दुश्मन देता धोखे नित नए,
अपनों की बेवफ़ाई से टूटा है हर कोई।

ज़िन्दगी की दौड़ में रौंदता रिश्ते सभी,
जीत के नशे में खुद को भूला है हर कोई।

मंज़िल की तलाश में लहरों से टकराए,
साहिल के थपेड़ों से उलझा है हर कोई।

सुकून की राह में उम्मीदों का सहारा लिए,
अंजाम से बेख़बर जिए जा रहा है हर कोई।

— मुनीष भाटिया

मुनीष भाटिया

जन्म स्थान : यमुनानगर (हरियाणा) उपलब्धियां: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख एवं कविताएँ I प्रकाशन: चार कविता संग्रह एवं तीन निबंध संग्रह, तीन quote बुक्स राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की दस हजार से अधिक पत्र पत्रिकाओं में वर्ष 1989 से निरंतर प्रकाशन I 5376, एरोसिटी, ऍफ़ ब्लाक, मोहाली -पंजाब M-7027120349 munishbhatia122@gmail.com