जुबान के बोल
विष केवल साँपों में नहीं,इंसाँ भी उगल जाता है,कटु वचनों की ज्वाला में,अपनों को ही जलाता है। महाभारत की अग्नि
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Read Moreमतलब की डोर से बंधाहर एक इंसान है,स्वार्थ से बना हर रिश्ताआज हुई पहचान उसकी।जब तक है मतलब,तब तक मुस्कुराता
Read Moreकिसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति में उद्योगों को उसका इंजन और श्रमिक वर्ग को उसकी प्राणवायु माना जाता है।
Read Moreराम केवल इतिहास या ग्रंथों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के अंतर्मन में बसने वाली वह चेतना है, जो हमें
Read Moreसदियों से मानव की कमजोरीनारी को समझा गया हर बार,विजय चिन्ह समझ लूट लियाजैसे कोई युद्ध का उपहार। कभी अपनों
Read Moreनीतीश कुमार को राज्यसभा भेजे जाने से उनके लंबे प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव का लाभ राष्ट्रीय स्तर पर मिल सकता
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