कविता

बलिदान

मातृभूमि पर मिटने वालों को, शत-शत मेरा प्रणाम,
भगत सिंह, सुखदेव,राजगुरू तुमसे रोशन हिंदुस्तान।

केसरी चोला ओढ़ के तुमने, मौत को गले लगाया था,
हँसते-हँसते फाँसी चढ़कर, आज़ादी का दीप जलाया था।

ना डर था तुमको सूली का, ना भय अत्याचारों का,
हर धड़कन में गूंज रहा था, नारा इंकलाब का।

मां भारती की खातिर, खुद को तुमने कुर्बान किया,
अपनी हर एक साँस को तुमने, भारत के नाम किया।

जब-जब दुश्मन आँख उठाए, याद तुम्हारी आती है,
हर नौजवान के सीने में, ज्वाला बनकर जल जाती है।

तुमसे सीखा जीना और तुमसे सीखा मर जाना,
देश की खातिर हँसते-हँसते, हर दर्द को सह जाना।

— मुनीष भाटिया

मुनीष भाटिया

जन्म स्थान : यमुनानगर (हरियाणा) उपलब्धियां: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख एवं कविताएँ I प्रकाशन: चार कविता संग्रह एवं तीन निबंध संग्रह, तीन quote बुक्स राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की दस हजार से अधिक पत्र पत्रिकाओं में वर्ष 1989 से निरंतर प्रकाशन I 5376, एरोसिटी, ऍफ़ ब्लाक, मोहाली -पंजाब M-7027120349 munishbhatia122@gmail.com