बलिदान
मातृभूमि पर मिटने वालों को, शत-शत मेरा प्रणाम,
भगत सिंह, सुखदेव,राजगुरू तुमसे रोशन हिंदुस्तान।
केसरी चोला ओढ़ के तुमने, मौत को गले लगाया था,
हँसते-हँसते फाँसी चढ़कर, आज़ादी का दीप जलाया था।
ना डर था तुमको सूली का, ना भय अत्याचारों का,
हर धड़कन में गूंज रहा था, नारा इंकलाब का।
मां भारती की खातिर, खुद को तुमने कुर्बान किया,
अपनी हर एक साँस को तुमने, भारत के नाम किया।
जब-जब दुश्मन आँख उठाए, याद तुम्हारी आती है,
हर नौजवान के सीने में, ज्वाला बनकर जल जाती है।
तुमसे सीखा जीना और तुमसे सीखा मर जाना,
देश की खातिर हँसते-हँसते, हर दर्द को सह जाना।
— मुनीष भाटिया
