चांद भी शर्माए
हाथों में तेरा हाथ रहे,
संग मेरे हर एक रात रहे,
चाँद भी शर्माए जब देखे,
तेरे नाम की वो सौगात रहे।
उपवास की ये प्यारी घड़ी,
तेरे प्यार में सजती बड़ी,
सिंदूर की लाली में बस जाए,
तेरी मुस्कान की झलक प्यारी।
कहानियाँ छोड़ दे अब मन की,
न शिकवे रहें, न कोई उलझन की,
आज तो बस दुआ यही माँगूँ,
तेरी उम्र बढ़े हर जनम की।
खामोशियाँ भी ग़ज़ब होती हैं,
चाहतों को लफ़्ज़ों में ढलने नहीं देतीं,
पर आज ये चाँद गवाह बने,
हमारी दुआएँ अधूरी ना रहे बाकी।
ख्वाहिश बस इतनी—तेरा साया रहे,
हर साँस में तेरा नाम आए,
दिल की हर आरज़ू को मुकाम मिले,
करवा चौथ हर साल यूँ ही मुस्कुराए।
बस… हाथों में तेरा हाथ रहे,
चाँदनी में तेरी बात रहे,
जनम-जनम का ये रिश्ता सजे,
तेरी बाँहों में ही हर रात रहे।
— मुनीष भाटिया
