कविता

चांद भी शर्माए

हाथों में तेरा हाथ रहे,
संग मेरे हर एक रात रहे,
चाँद भी शर्माए जब देखे,
तेरे नाम की वो सौगात रहे।

उपवास की ये प्यारी घड़ी,
तेरे प्यार में सजती बड़ी,
सिंदूर की लाली में बस जाए,
तेरी मुस्कान की झलक प्यारी।

कहानियाँ छोड़ दे अब मन की,
न शिकवे रहें, न कोई उलझन की,
आज तो बस दुआ यही माँगूँ,
तेरी उम्र बढ़े हर जनम की।

खामोशियाँ भी ग़ज़ब होती हैं,
चाहतों को लफ़्ज़ों में ढलने नहीं देतीं,
पर आज ये चाँद गवाह बने,
हमारी दुआएँ अधूरी ना रहे बाकी।

ख्वाहिश बस इतनी—तेरा साया रहे,
हर साँस में तेरा नाम आए,
दिल की हर आरज़ू को मुकाम मिले,
करवा चौथ हर साल यूँ ही मुस्कुराए।

बस… हाथों में तेरा हाथ रहे,
चाँदनी में तेरी बात रहे,
जनम-जनम का ये रिश्ता सजे,
तेरी बाँहों में ही हर रात रहे।

— मुनीष भाटिया

मुनीष भाटिया

जन्म स्थान : यमुनानगर (हरियाणा) उपलब्धियां: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख एवं कविताएँ I प्रकाशन: चार कविता संग्रह एवं तीन निबंध संग्रह, तीन quote बुक्स राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की दस हजार से अधिक पत्र पत्रिकाओं में वर्ष 1989 से निरंतर प्रकाशन I 5376, एरोसिटी, ऍफ़ ब्लाक, मोहाली -पंजाब M-7027120349 munishbhatia122@gmail.com