कविता

परिवर्तन लाना पड़ता है

अपने आप आती है बारिश,
थमने नहीं स्वीकारती कोई गुजारिश,
आंधी के आने का कोई काल नहीं है,
जिसे रोकने के लिए कोई जाल नहीं है,
खुदबखुद आ जाती है तूफान,
क्या पता ले ले कितनों की जान,
मगर किसी की जान लिए बिना
महापुरुष गण परिवर्तन लाते हैं,
तात्कालिक अवरोधों से बेफिक्र टकराते हैं,
भले ही सड़े गले लेकिन
तत्कालीन समय के सशक्त
प्रचलित व्यवस्था से टकराना,
कोई बांये हाथ वाला खेल नहीं है,
जहां विचारों का होता मेल नहीं है,
अवैज्ञानिक,अमानुषिक नियम
हर किसी के लिए समान नहीं होते,
विभेदों से भरे ग्रंथवाणी में ज्ञान नहीं होते,
इंसान होकर भी इंसान इंसान नहीं होते,
ऐसी प्रथाओं के लिए खपना बलिदान नहीं होते,
इस दुनिया में अंधविश्वास,पाखंड
और भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है,
नैतिकता,सत्य,दया से बड़ा भगवान नहीं है,
बुद्ध,गुरू नानक,रैदास,कबीर,
गुरू घासीदास,फुले,अम्बेडकर,पेरियार,
कांशीराम जैसों का सदा रहता इंतजार,
इन सबने इंसानों को गले लगाया है,
तभी तो हर शख्स निर्विवाद रूप से
युग परिवर्तक महापुरुष कहलाया है।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554