मुक्तक/दोहा

दोहे – सत्य की राह

सत्य साधकर गति करो,तब ही बनो महान।
केवल सच से ही बने,इंसाँ नित बलवान।।

सत्य चेतना को रखे,जिसमें रहे विवेक।
रीति-नीति को साध ले,रखकर इच्छा नेक।।

सत्य बड़ा गुण जान ले,इसका हो विस्तार।
जीवन में खिलते सुमन,बनकर के उपहार।।

सत्य सदा ही जीतता,गाता मंगल गीत।
इसको हम अब लें बना,अपने मन का गीत।।

सत्य सदा हित साधता,लाता है उत्थान।
जो चलता सद राह पर,सदा पूर्ण अरमान।।

सत्य धर्म का रूप है,जिसमें हैं भगवान।
सच के पथ पर जो चले,उसका हो यशगान।।

सत्य दमकता सूर्य-सा,देता जो आलोक।
जिससे होता दूर नित,जीवन का हर शोक।।

सत्य सुहाता है जिसे,उसकी हो जयकार।
कभी सत्य हारे नहीं,होकर के लाचार।।

सत्य एक है साधना,साधक हरदम वीर।
वक़्त संग परिणाम है,देखो बनकर धीर।।

सत्य सनातन मान्यता,सत्य बड़ा इक युद्ध।
जो लड़ता है झूठ से,बन जाता है बुद्ध।।

— प्रोफेसर शरद नारायण खरे

*प्रो. शरद नारायण खरे

प्राध्यापक व अध्यक्ष इतिहास विभाग शासकीय जे.एम.सी. महिला महाविद्यालय मंडला (म.प्र.)-481661 (मो. 9435484382 / 7049456500) ई-मेल-khare.sharadnarayan@gmail.com