कविता

छठ पर्व

सूर्य निकलने में हुई है देर
पूरब दिशा में मची है शोर
चार दिन का यह त्यौहार
नहाए खाएं खड़ना छठी बार
सब व्रतों में कठिन है व्रत
सबके मन को भाता पर्व
सूर्य देव चढ़ रथ से आवे
आकर अपना भोग लगावे
सुख शांति समृद्धि देती
अपने सेवक को शक्ति देती
उगते सूरज डूबते सूरत
पूजा अर्चन करते सेवक
छठी मैया की महिमा महान
इसको जानत है संसार।

— विजया लक्ष्मी

*विजया लक्ष्मी

बिजया लक्ष्मी (स्नातकोत्तर छात्रा) पता -चेनारी रोहतास सासाराम बिहार।