सामाजिक

अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस, सृजनशीलता और संस्कृति का विश्व महोत्सव

कला मानव सभ्यता की आत्मा है, यह वह माध्यम है जिसके द्वारा इंसान अपने भीतर की संवेदनाओं, अनुभूतियों और विचारों को रूप, रंग, ध्वनि और शब्दों के माध्यम से प्रकट करता है। जब मानव ने पहली बार पत्थर की गुफाओं की दीवारों पर चित्र बनाए होंगे, जब उसने लकड़ी पर आकृतियाँ उकेरी होंगी या जब उसकी आवाज़ ताल और सुर में ढलकर गीत बनी होगी, तभी से कला का अस्तित्व प्रारंभ हुआ होगा। उसी सृजनशील चेतना को स्मरण करने और कलाकारों के योगदान का सम्मान करने हेतु प्रत्येक वर्ष ‘अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन विश्वभर में कलाकारों को उनकी अनूठी दृष्टि, संवेदनशीलता और समाज को दिशा देने की क्षमता के लिए सम्मानित किया जाता है। एक चित्रकार जब कैनवास पर अपने विचारों की छाप छोड़ता है, तो वह केवल रंग नहीं भरता बल्कि समाज की आत्मा को उकेरता है,एक संगीतकार जब सुरों में भावनाएँ पिरोता है, तो वह मानव हृदय के अदृश्य तारों को झंकृत करता है; एक कवि जब शब्दों में अनुभवों का संसार रचता है, तो वह समय का साक्षी बन जाता है। इसी प्रकार हर कलाकार अपने सृजन से विश्व को भावनात्मक गहराई, सांस्कृतिक पहचान और मानवीय अपनत्व प्रदान करता है। अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस विभिन्न देशों में अनेक आयोजनों के माध्यम से मनाया जाता है,चित्रकला प्रदर्शनियां, संगीत समारोह, नाट्य प्रस्तुतियाँ, नृत्य-प्रयोग और रचनात्मक कार्यशालाएँ इस दिन की शोभा बढ़ाते हैं। इसका उद्देश्य केवल कलाकारों का सम्मान करना नहीं बल्कि समाज में सृजन की महत्ता को पुनर्स्थापित करना भी है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ समझ सकें कि तकनीकी प्रगति के बावजूद जीवन की असली सुंदरता कला में ही निहित है। भारत में भी यह दिवस विशेष भावनात्मक महत्व रखता है क्योंकि यहाँ की कलात्मक परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है,अजन्ता-एलोरा की गुफाओं के चित्र, खजुराहो की मूर्तिकला, मधुबनी और वारली की लोककला, भरतनाट्यम और कथक जैसी शास्त्रीय नृत्य विधाएँ, सितार और तबले की सुरलहरियाँ, मुगल चित्रकला की बारीकियाँ, उर्दू शायरी की नज़ाकत, इन सभी ने भारत को सांस्कृतिक रूप से विश्व के उच्चतम स्थान पर पहुँचाया है। जब हम राष्ट्रीय दिवसों की चर्चा करते हैं, तो वे देश की एकता, सम्मान और गौरव का प्रतीक होते हैं। जैसे गणतंत्र दिवस हमें संविधान और स्वतंत्रता की याद दिलाता है, वैसे ही अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं होती बल्कि सृजन की स्वतंत्रता भी उतनी ही आवश्यक है। कलाकार अपने विचारों की आज़ादी के माध्यम से समाज को नई दृष्टि देता है और यही उसका राष्ट्र तथा विश्व के प्रति सबसे बड़ा योगदान होता है। वास्तव में जब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दिवस एक साथ मनाए जाते हैं, तब हम भौगोलिक सीमाओं को पार करते हुए मनुष्यता की साझा धारा में प्रवेश करते हैं जहाँ राष्ट्रप्रेम और कलाप्रेम एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं। यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि कला किसी देश, जाति या भाषा की सीमा में नहीं बंधती, यह संपूर्ण मानवता की विरासत है जिसका सम्मान हर व्यक्ति और हर समाज का कर्तव्य है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस केवल उत्सव नहीं बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है,यह याद दिलाता है कि सृजनशीलता ही वह शक्ति है जिससे दुनिया सुंदर, संवेदनशील और एकजुट रह सकती है।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।