बाल कविता

जल्दी उठ जाओ

बाग लगता मुर्गा आया,
बड़े ज़ोर से हमें जगाने।
बोला जल्दी से उठ जाओ,
ढेरों काम चलो निबटाओ ।
देखो चिड़िया भी जग कर,
ची ची की आवाज़ लगाती।
फूट रही सूरज की लाली,
दिन होने की अलख जगाती।
कमल खिल गए भंवरे गाते,
ठंडी ठंडी हवा भी लाते।
जल्दी उठो पाठशाला जाओ,
वहां समय से तुमको जाना।
मन को खूब लगाकर पढ़ना,
टीचर से शाबाशी पाना ।
मैना ने आवाज़ लगाई,
कहती हैं विद्यालय चलना।
तेरे संग मुझको हैं रहना।

— आसिया फारूकी

*आसिया फ़ारूक़ी

राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका, प्रधानाध्यापिका, पी एस अस्ती, फतेहपुर उ.प्र