कविता

क़िरदार से जुदा

एक कहानी का
क़िरदार अपने ही
क़िरदार से जुदा हो गया……
ज़िंदगी में अपनों के
मायने जब समझा
हर वो अपने का भाव
मौन आँखों से ओझल हो गया…..
सादगी से जीता क़िरदार
साजिशों मे झुलस गया….
बिन एहसासों की दुनियां में
एक क़िरदार खत्म हो गया….
हारा है वो भी अपनों से
हारा कभी जब सपनों से
आँखों से ढुलकते आँसू
कहानी कह जुदा हो गया…
रौंद के मारा एहसासों को
आस का कतरा ख़ाक हुआ
राख बची रुह के हवाले कर
जींवन के सफ़र का अंत हो गया…
क़िरदार की सिसकी गूँजी
फिर ना सुबह की आस में
खत्म हुई कल की पारी
झूठ के ख़ातिर सच को
हमेशा जलाता रहा..
अपने ही बारी आग से
फिर वो किरदार ..
वफ़ा के किरदार से जुदा हुआ…
कि प्रेम को खुद में जी कर
क़िरदार को कहानी से जुदा किया..!!

— नंदिता

तनूजा नंदिता

नाम...... तनूजा नंदिता लखनऊ ...उत्तर प्रदेश शिक्षा....एम॰ ए० एंव डिप्लोमा होल्डर्स इन आफिस मैनेजमेंट कार्यरत... अकाउंटेंट​ इन प्राइवेट फर्म वर्ष 2002से लेखन में रुचि. ली... कुछ वर्षों तक लेखन से दूर नहीं... फिर फ़ेसबुक पर वर्ष 2013 से नंदिता के नाम से लेखन कार्य कर रही हूँ । मेरे प्रकाशित साझा संग्रह.... अहसास एक पल (सांझा काव्य संग्रह) शब्दों के रंग (सांझा काव्य संग्रह) अनकहे जज्बात (सांझा काव्य संग्रह ) सत्यम प्रभात (सांझा काव्य संग्रह ) शब्दों के कलम (सांझा काव्य संग्रह ) मधुबन (काव्यसंग्रह) तितिक्षा (कहानी संग्रह) काव्यगंगा-1 (काव्यसंग्रह) लोकजंग, शिखर विजय व राजस्थान की जान नामक पत्रिका में समय समय पर रचनाएँ प्रकाशित होती रहती है । मेरा आने वाला स्वयं का एकल काव्य संग्रह... मेरी रुह-अहसास का पंछी प्रकाशन प्रक्रिया में है नई काव्य संग्रह- काव्यगंगा भी प्रकिया में है कहानी संग्रह भी प्रक्रिया में है संपर्क e-mail logontanu@gmail.com Facebook gnanditadas@yahoo.com