कविता

इस्तेमाल….!!

मैंने देखा है अक्सर लोगों को बिल्कुल हिचकते नहीं.. एक पल भी सोचते नहीं.. अपने हित के आगे उनको.. सच कहूं …. कभी कुछ भी दिखता नहीं. हाँ, उनको खलती है अपनी महत्ता अपने हो कर भी ना होने की वो छिपी मानसिकता… जो बहुत देर तक दिखावा करते-करते उसके बाद..फ़िर सामने ही आ जाते […]

कविता

मैं और तुम का … कुछ नया सा इश्क़ …..!!

सुनो मैंने पढ़ा है अमृता प्रीतम के इश्क़ को लेकिन मुझे इश्क़ बन इश्क़ से इश्क़ करना कि जैसे हो तुम जैसे ही हम मिल जाए हमेशा के लिए मैं और तुम….. ये समझा उन्हें पढ़कर कि समुन्दर से आसमां कभी नहीं मिलता फिर भी बादलो में सिम्त जाता है इश्क़ कि बरसेंगे कभी तो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ज़माने से खुद को निभाये हैं हम…!!

12 2 1  2  2 122 12  (1386) —————————— ज़माने से खुद को निभाये हैं हम गलत बात पर तिलमिलाये हैं हम… दिखावे की दुनियां करें साज़िशें यही सोच खुद को बचाये हैं हम… उम्मीदों पे कायम है सारा जहाँ खुदी हौसलों में समाये हैं हम… बड़े शौक़ गैरों से मिलते सभी वजह दूरियों की […]

कविता

प्रेम दीवानी

सोचा जो कभी प्रेम तुम बहुत करीब से गुज़रे.. सुबह ख्यालों में  साथ दिन तो इधर-उधर गुज़रे.. सांझ पहर साँसों में बेचैनी तन्हाई भरी हर शाम गुज़रे… होठों  पर फरियाद बुनो चाँद को देख रात गुज़रे .. एक तुम्हारा चेहरा मुस्कुराता मेरे दिल का वो सुकून दिलाता … उम्र भर प्रेम में तुम अपने जीवन संग तुम में गुज़रे… और आखरी साँसों तक तुम्हारे नाम से गुज़रे…!! — नंदिता

कविता

स्क्रीनशॉट…!!

चटपट खींच लेती मोबाइल के स्क्रीन पर दिखती जो तस्वीर.. वही कहलाती स्क्रीनशॉट… एस-एस निक नेम से जाना जाए.. प्रूफ के काम मे लाया जाए फ़ेसबुक की दुनियां की… मनचली तासीर… जितना जाना है बस इतना समझा समझ की समझदारी.. ज्ञान की साझेदारी.. गूगल पर मिलती जानकारी की पल में खींच जाती ज्ञानवर्धक स्क्रीनशॉट लेकर […]

लघुकथा

अबार्शन

“क्यों कराऊँ मैं, बोलों न?” बस इसलिए कि, तुम अभी दूसरा बच्चा नहीं चाहते और डर ये कही अब लड़की न हो जाए? पूरी खींझ के साथ रति अपने पति नवीन से कहती है। नवीन पूरे गुस्से में था, बोला ज़बान मत चला, जितना कह रहा हूँ सुनों कि, ” मुझे अब बच्चा चाहिए ही […]

कविता

मन्नत का धागा

लाल रंग कच्चा इरादों में पक्का बाधं आयी ..सुन तेरे नाम का धागा सच्चा.. अहसास सारे मन के सब तेरे इक-इक गांठ लगा आयी..सुन पूरे तेरे इरादे जहां हो अच्छा.. थोड़ी सी मुस्कुराहट तेरे साथ की वो आहट बातों-बातों में रब से मांग आयी…सुन मेरी मांग में तेरे प्रेम का लाल सिंदूर पक्का… अहसास हम […]

कविता

परमपराएं…!!

सदियों से चलती… जीवन में बसती .. सांसो से उतर के .. रग-रग में समाकर.. फिर…लहू संग बहती सबमें जीती है… ये परम्पराएं… विचारों की विधा… बुजुर्गों की व्यथा.. संस्कृति की गाथा… प्रथाओं ने निभाई… सामाजिक कथाओं में मौलिक अभिव्यक्ति.. ये परम्पराएं.. विधि का है ज्ञान.. दृष्टिकोण में दृढ़संकल्प दायित्वों में सर्वसम्मान धार्मिक प्रवृत्ति आलेख.. […]

कविता

दरारें…!!

घर की चारदीवारी हो या एहसासों की दीवार… कुछ समय की अटखेलियां तो कभी रिश्तों की मार… धीरे-धीरे ही कमजोर है करता.. स्वार्थी मन रिस्ता रहता… जीवन के ताने-बाने में… जब कोई दरार है पड़ता…. नही भरती कभी चाह के भी… इक बार जो पड़ जाये दरारें…. नही टिका सकती पहले सी मिनारें… दोस्ती, मोहब्बत, […]

कविता

प्रेम-बंधन..!!

जानती हूँ जितनी वफ़ा मैं जीती उसकी दो गुनी सांसे तुम्हारी है… रातें, लम्बी गहरी काली खामोश… फिर भी जिंदगी हर सुबह ..सदा तुम्हारे साथ ही मुस्कुराती है… बिंदी, सिंदूर, माथे की कुमकुम साजन की सजनी मिले हम-तुम हर वादे पे थामे हाथ तुम्हारा तुम संग जियें वो अरमां हमारा कि नंदिता बंधी विश्वास के […]