राजनीति

पश्चिम बंगाल में SIR से बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या घुसपैठियों में हाहाकार

पहले आप लोगों को बता दूं कि, SIR का दुसरा चरण आयोजित किया जा रहा है, उनमें से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप, लक्षद्वीप, गोवा, गुजरात, केरल, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल एवं तमिलनाडु शामिल हैं। इनमें से तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होंगे।।

अब पोस्ट की मुख्य विषयवस्तु पर चलते हैं। ये जो SIR चल रहा है, उसमें तो सिर्फ मतदाताओं का पुनरीक्षण किया जाएगा और इसमें फेल होने पर सिर्फ मतदाता सूची से नाम कट सकती है, लेकिन SIR के आते ही यह घुसपैठिये भाग क्यों रहे हैं? असल बात यह है कि, यह सभी घुसपैठिये SIR के चलते नहीं बल्कि Immigration and Foreigners act 2025 IAF के कारण भाग रहे हैं।। वास्तविकता यह है कि जब देश में राहुल गांधी समेत पूरा विपक्ष ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ की तथाकथित झूठे कैंपेन चला रहे थे, तब भारत के गृहमंत्री संसद में Immigration and Foreigners act 2025 पास करवा रहे थे।।

तो.. पहले इस नए कानून के बारे में कुछ जान लेते हैं, ताकि आप लोगों को समझने में और भी आसानी हो सकता है….
Immigration and Foreigners Act, 2025 IAF भारत का एक नया कानून है जो 1 सितंबर 2025 से लागू हुआ है। यह भारत में विदेशियों के प्रवेश, आवाजाही और निवास को नियंत्रित करने के लिए पुराने कानूनों जैसे Passport Entry into India Act 1920, Registration of Foreigners Act 1939, आदि को प्रतिस्थापित करता है। इस अधिनियम का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है, आव्रजन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और उल्लंघन के लिए कठोर दंड का प्रावधान करना है।।

इस आप्रवास और विदेशियों विषयक अधिनियम, 2025 के प्रमुख प्रावधान क्या हैं..?

1 = कड़े नियम: यह अधिनियम अवैध आप्रवासन और सुरक्षा खतरों को रोकने के लिए कठोर दंड और सख्त नियमों को लागू करता है।।

2 = डिजिटल निगरानी: विदेशियों की ट्रैकिंग और निगरानी के लिए एक डिजिटल प्रणाली स्थापित की गई है।।

3 = पुराने कानूनों का प्रतिस्थापन: इसने Passport Entry into India Act, 1920; Registration of Foreigners Act 1939; Foreigners Act, 1946; और Immigration Carriers’ Liability Act, 2000 को निरस्त कर दिया है।।

4 = इसमें अपवाद: कुछ अल्पसंख्यकों को पंजीकरण जैसे कुछ नियमों से छूट दी गई है।।

5 = उत्तरदायित्व: वाहकों जैसे कि एयरलाइंस और शिपिंग कंपनियों के लिए भी यह भी सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि वे आव्रजन नियमों का उल्लंघन न करें।।

6 = जाली यात्रा दस्तावेज़ों के लिये कठोर दंड: जाली पासपोर्ट, वीज़ा या अन्य यात्रा दस्तावेज़ों का उपयोग करने या आपूर्ति करने पर 2-7 वर्ष का कारावास और 1-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। वैध अनुमति के बिना प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने वाले विदेशियों के लिये 5 वर्ष तक का कारावास या 5 लाख रुपये का ज़ुर्माना हो सकता है।।

7 = विदेशियों के विवरण की अनिवार्य रिपोर्टिंग: होटलों, विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और नर्सिंग होम को अपने यहाँ रहने वाले या आने वाले विदेशी नागरिकों के बारे में जानकारी देनी होगी। अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइनों और शिपिंग कंपनियों को आगमन से पहले यात्रियों और चालक दल का डेटा साझा करना आवश्यक है।।

8 = परिसरों पर सरकारी नियंत्रण: सुरक्षा कारणों से आवश्यक समझे जाने पर, केंद्र सरकार को विदेशियों द्वारा अक्सर दौरा किये जाने वाले परिसरों को विनियमित करने या बंद करने का अधिकार है।।

9 = आप्रवासन ब्यूरो: ये अधिनियम आप्रवासन ब्यूरो जो 1971 में खुफिया ब्यूरो के तहत स्थापित को कानूनी मान्यता प्रदान करता है, जिससे ब्यूरो को अवैध विदेशियों की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और देश से निर्वासित करने का अधिकार मिलता है।।

1 सितंबर 2025 को आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम 2025 (‘नया अधिनियम’) लागू हुआ है, जो विदेशी नागरिकों और वीजा से संबंधित मामलों को विनियमित करता है, राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों को मजबूत करता है, आव्रजन प्रक्रियाओं में जवाबदेही बढ़ाता है, और उल्लंघन के लिए कठोर दंड निर्धारित करता है।।

इसे सरल भाषा में समझें तो; बिना वैध पासपोर्ट या वीजा के भारत घुसने वालों को 5 साल की जेल और 5 लाख का जुर्माना होगा, और अगर किसी घुसपैठिये ने भारत आकर अपना फर्जी डाक्यूमेंट्स भी बना रखा है तो फिर उस पर 10 लाख का जुर्माना और हथकड़ी बांध कर डिपोर्टेशन जैसे प्रावधान शामिल हैं। क्योंकि, केन्द्र की भाजपा सरकार अब इस देश को पूर्ववर्ती सरकारों की तरह धर्मशाला नहीं बनने देगी। यह सभी बातें इन अवैध घुसपैठियों में बहुत ज्यादा डर पैदा कर दिया है, क्योंकि SIR तो उनको सिर्फ वोटर लिस्ट से बाहर करेगा, न की देश से। जब SIR से इन लोगों की पहचान हो जाएगी कि, यह लोग अवैध हैं तो, होगा ये कि जिसके पास वोटर कार्ड नहीं है, वो भारतीय नहीं है, और जाहिर सी बात है कि अगर कोई भारतीय नहीं है तो वह फिर घुसपैठिया है, और जब वे घुसपैठिया है, तो उस पर IAF 2025 कानून अपने आप लागू हो जाएगा। इसीलिए SIR आने के बाद उन अवैध घुसपैठियों में भगदड़ मची हुई है।।

SIR को लेकर पश्चिम बंगाल के वर्तमान के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चाहे कितना भी उनके साथ खड़ा हो जाए और अराजकता फैलाने की कोशिश कर लें, लेकिन भारत में रह रहे अवैध घुसपैठिये यह बात अच्छी तरह से समझ गए हैं कि अगर भूल से भी वे इस SIR और IAF में फंस गए तो ममता क्या सुप्रीम कोर्ट भी उन्हें नहीं बचा पाएंगी, क्योंकि यह केंद्रीय कानून हैं और नागरिकता देना-लेना केंद्र सरकार की अधीन है। आप लोग इस पोस्ट को पढ़ते पढ़ते 4 नंबर प्रावधान को पढ़कर खुश नहीं हो रहे होंगे…..तो चलिए इस पर जानकारी दे दूं कि, अगर यह घुसपैठिये पाकिस्तान, बांग्लादेश अथवा अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक यथा हिन्दू, सिख, हिसाई या पारसी हैं तो फिर उन्हें ही इसमें जगह दिया गया है, यानी की यह लोग भारत में अल्पसंख्यक हैं। यह सभी CAA कानून के तहत नागरिकता का आवेदन कर आसानी से भारत की नागरिकता बन सकते हैं। IAF कानून लागू होने से पहले CAA कानून लागू हो गया था, इसलिए उन अल्पसंख्यकों पर IAF 2025 कानून लागू नहीं होगा।।

केन्द्र की BJP सरकार केवल अपनी चुनावी मैनेजमेंट की चाक-चौबंद व्यवस्था नहीं कर रही, बल्कि 370 रिमूवल की ही तरह SIR के मामले में भी पूरी चाक चौबंद व्यवस्था कर रखी है। पूरे देश से घुसपैठियों की इतनी बड़ी भगदड़ SIR से नहीं, IAF 2025 की सख़्त धाराओं से है। नकली दस्तावेज़, फर्जी पहचान और चोरी-छिपे घुसपैठ, अब इन सबकी कीमत जेल, भारी जुर्माना और सीधा डिपोर्टेशन है। मतदाता सूची से नाम कटना तो शुरुआत है, असल डर तो इस बात का है कि नाम कटते ही पहचान खुल जाएगी, और फिर कानून अपनी कार्रवाई करेगी। उसे न तो ममता, न प्रशांत भूषण, न कांग्रेस, न UN, न कपिल सिब्बल और न ही माननीय सुप्रीम कोर्ट। इसलिए पप्पू & कंपनी Zen-G को भड़काने के लिए ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ जैसे तथाकथित कैंपेन चला रहा है, ताकि इन लोगों की उन अवैध वोटबैंक की बचाव हो सके। एक-डेढ़ महीने पहले पहले गृहमंत्री अमित शाह जी ने, आज तक न्यूज चैनल की एक शो में यह कहा था कि, इन अवैध घुसपैठियों को देश से इस तरह से निकाला जाएगा कि, न इसे कोई रोक पाएगा, न इसे कोई समझ पाएगा। मित्रों.. पोस्ट थोड़ा बड़ा है, लेकिन आप लोग इसे पढ़ते जाएंगे तो आप लोगों को सबकुछ समझ में आ जाएगा।।

यह अखबार की कटिंग तो आज की है, लेकिन पूरे देशभर के अखबारों में इस तरह के खबरें भरी पड़ी है कि, आज पश्चिम बंगाल से, आज त्रिपुरा से, आज असम से, आज मणिपुर से इतने घुसपैठियों को डिपोर्ट भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर किया गया है, या यह अपने आप भाग रहे हैं।

— संकलित