गीत/नवगीत

एकता का सूत्र

वक्त की आवाज यही है
हम आपसी मन-मुटाव भुलाएं
जाति-पाति का सब भेद मिटाकर
एकता के सूत्र में बंध जाएं।

सगरे विश्व की निगाह है हम पर
प्रगति हमारी उन्हें रास न आ रही
उनकी कुंठाओं पर न ध्यान देकर
चमकता एक सितारा बन जाएं।

पश्चिम वाले न भरोसे के काबिल
पल-पल में वह रंग बदलते हैं
उनकी धमकियों से क्यों डरें हम
अपनी ताक़त का एहसास कराएं

कभी इनको तो कभी उनको
दिखाते अपनी दादागिरी जग को
विश्व के हम सबसे बड़े लोकतंत्र
उनके कुचक्रों में हम न फंस‌ जाएं

देसी उत्पादों को प्राथमिकता दें
पाश्चात्य के मकड़जाल से रहें दूर
विदेशी वस्तु पर निर्भरता घटाकर
आओ हम आत्मनिर्भर बन जाएं

धमकियां तो पहले भी देते आए
दोस्ती के नाम पर दुश्मनी निभाए
गिरगिट की माफिक रंग बदलते
ऐसे दोस्तों से क्यों दोस्ती बढ़ाएं

ध्यान रहे एकता में है बहुत ताकत
जो बंट गए तो आफ़त ही आफ़त
विदेशी पहले भी हमें छल चुके हैं
इस बार हम उन्हें सबक सिखाएं

वक्त की आवाज यही है
हम आपसी मन-मुटाव भुलाएं
संकटकाल से गुजर रहा भारत
एकता के सूत्र में सब बंध जाएं।।

वक्त की आवाज यही है
एकता के सूत्र में सब बंध जाएं।।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई