स्वास्थ्य

सर्दियों का ठंडा और सूखा मौसम त्वचा को रूखा, फ़टा और बेजान बना देता है

सर्दियों का ठंडा और सूखा मौसम त्वचा को रूखा, फ़टा और बेजान बना देता है क्योंकि ठंडी हवा नमी चुरा लेती है, हीटर हवा को और शुष्क करते हैं तथा गर्म पानी नहाने से प्राकृतिक तेल नष्ट हो जाते हैं, इसलिए बाहर निकलते समय गर्म दस्ताने, मफ़लर और मोटे कपड़े पहनें जो त्वचा को ठंडी हवा से बचाएं, घर में ह्यूमिडिफायर चलाएं, (ह्यूमिडिफायर एक ऐसा विद्युत उपकरण है जो कमरे या घर की हवा में नमी की मात्रा बढ़ाता है, विशेष रूप से शुष्क मौसम में। यह पानी को भाप या महीन धुंध के रूप में वाष्पीकृत करके हवा में फैलाता है, जिससे वातावरण नम और आरामदायक बनता है।) ताकि हवा में नमी बनी रहे और त्वचा सूखने से  बची रहे,घरेलू नुस्खे जो त्वचा को चमकदार बनाएं,नहाने के तुरंत बाद नारियल, बादाम या जैतून तेल से मालिश करें जो नमी लॉक करे, रात को एलोवेरा-गुलाब जल या शहद-अदरक पैक लगाएं,शहद को एलोवेरा जेल में मिलाकर 15-20 मिनट रखें फिर गुनगुने पानी से धो लें। सप्ताह में दो बार दूध-बादाम पेस्ट या जई का दलिया-नाशपाती का गूदा मास्क आजमाएं जो दाग-धब्बे मिटाए और मुलायम बनाए, होंठों पर शहद-ग्लिसरीन लिप बाम लगाएं तथा हाथ-पैरों के लिए प्याज का रस-शहद मिश्रण उपयोगी है,दैनिक रूटीन और सुरक्षा टिप्स अपनाएं,

गुनगुने पानी से नहाएं, साबुन कम करें, तुरंत गाढ़ा मॉइस्चराइजर  लगाएं, दिन में हल्का सनस्क्रीन  लगाना न भूलें न क्योंकि  अल्ट्रा वॉयलेट किरणें सर्दियों में भी नुकसान पहुंचाती हैं। संवेदनशील त्वचा वालों के लिए सुगंधरहित उत्पाद चुनें,खानपान व सुबह की धूप से अंदरूनी पोषण, का लाभ उठाएं,

सुबह 15-20 मिनट धूप लें,विटामिन डी त्वचा मजबूत करेगा, 8-10 गिलास पानी पिएं, संतरा-खीरा जैसे जलयुक्त फल खाएं। अखरोट, बादाम, अलसी बीज, व हर्बल टी से त्वचा अंदर से हाइड्रेट रहेगी, इनसे रूखापन भागेगा और चमक आएगी

— डॉ.मुश्ताक़ अहमद शाह 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।